दुर्गावती में फैक्ट्रियों व अधूरी सड़कों की धूल ने छीना ग्रामीणों का चैन

प्रखंड के दक्षिणी इलाकों में संचालित विभिन्न फैक्ट्रियों व अधूरी पड़ी सड़कों से उड़ रही धूल-कण (डस्ट) ने ग्रामीणों व किसानों का जीना मुहाल कर दिया है.

फोटो01.फसलो पर चढ़ी धुल की परत 02.अर्धनिर्मित सड़क से वाहनो के गुजरते समय उड़ती धूल 03.किसान शिवशंकर प्रजापति 04.किसान राजु सिंह 05.किसान हरेंद्र कुमार सिंह 06.फैक्ट्री की चिमनी से निकलता धुआं 07.बुजुर्ग किसान दीपन प्रजापति 08.किसान सुधीर कुमार सिंह फसलों पर जमी धूल की सफेद चादर, सांस की बीमारियों से जूझ रहे ग्रामीण प्रशासन से नियमित जांच व प्रभावित क्षेत्रों में पानी के छिड़काव की मांग दुर्गावती. प्रखंड के दक्षिणी इलाकों में संचालित विभिन्न फैक्ट्रियों व अधूरी पड़ी सड़कों से उड़ रही धूल-कण (डस्ट) ने ग्रामीणों व किसानों का जीना मुहाल कर दिया है. क्षेत्र के भेरिया–बराढ़ी तथा छांव–चांद पथ किनारे दर्जनों की संख्या में चल रही फैक्ट्रियों से निकलने वाले बारीक कण व अर्धनिर्मित सड़क से गुजरते वाहनों की धूल के कारण आसपास के गांवों में स्वास्थ्य व खेती दोनों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि आंखों में जलन, सांस लेने में परेशानी, अस्थमा व एलर्जी जैसी समस्याएं आम होती जा रही हैं. वहीं, खेतों में जमी धूल की मोटी परत से फसलों की प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया बाधित हो रही है, जिससे पैदावार व गुणवत्ता दोनों में गिरावट आ रही है. सबसे अधिक परेशानी एनएच-19 के भेरिया–बराढ़ी मोड़ पथ के आसपास बसे रैयती व समीपवर्ती गांवों के लोगों को झेलनी पड़ रही है. इस मार्ग के किनारे स्थित प्लास्टिक पाइप, धान भूसी प्रोसेसिंग व सीमेंट फैक्ट्रियों से उड़ने वाले बारीक कण हवा में घुलकर घरों की छतों तक पहुंच रहे हैं. ग्रामीणों के अनुसार, सुबह तीन से चार बजे के बीच धूल का प्रभाव अधिक रहता है. धनेछा, महमूदगंज, भेरिया व भदैनी गांवों की ओर इसका असर साफ देखा जा सकता है. खेतों, बधारों व यहां तक कि घरों के आंगन व छतों पर भी धूल की परत जम रही है. प्रशासन से किया हस्तक्षेप का अनुरोध ग्रामीणों का आरोप है कि जब भी किसी फैक्ट्री की जांच होती है, उन्हें इसकी पूर्व सूचना नहीं दी जाती, जिससे वे अपनी बात अधिकारियों के सामने नहीं रख पाते. लोगों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व स्थानीय प्रशासन से नियमित जांच, सड़क की शीघ्र मरम्मत तथा अस्थायी रूप से पानी के छिड़काव की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे जिला प्रशासन को लिखित शिकायत सौंपेंगे. -क्या कहते हैं किसान ==== –भेरिया पथ किनारे कि फैक्ट्रियों से निकलने वाले कण और अधूरी सड़क की धूल खेती के लिए बड़ी समस्या बन चुकी है. पहले जैसी पैदावार अब नहीं हो रही है. फैक्ट्री संचालकों को भी इस ओर ध्यान देना चाहिए. शिव शंकर प्रजापति – करीब डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित फैक्ट्रियों से उड़ने वाली डस्ट फसलों पर मोटी परत बना देती है. प्रकाश बाधित होने से फसल की वृद्धि प्रभावित हो रही है. हवा में घुली धूल घरों की छतों तक पहुंच जाती है. राजू सिंह – पहले एक एकड़ में 30–32 क्विंटल धान और लगभग 20 क्विंटल गेहूं की उपज होती थी, लेकिन अब उत्पादन में स्पष्ट कमी आयी है. अधूरी सड़क से गुजरते वाहनों के कारण इतनी धूल उड़ती है कि दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. मुन्ना सिंह – आंखों में धूल जाने से उन्हें इलाज कराना पड़ा. अब बिना चश्मा खेत की ओर जाने में डर लगता है. बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता बनी रहती है. जब तक सड़क पूरी न बन जाये, तब तक नियमित पानी का छिड़काव कराया जाना चाहिए. हरेंद्र कुमार सिंह – फैक्ट्री की बगल में ही उनकी खेती है. डस्ट के कारण खेतों में काम करना मुश्किल हो गया है. खाने-पीने की चीजों तक में धूल पहुंच जाती है. सब्जी और फलदार वृक्षों की खेती भी प्रभावित हो रही है. दीपन प्रजापति

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Published by: Vikash kumar

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