मोहनिया के दादर में लोगों ने लिया मृत्युभोज नहीं करने का सर्वसम्मत निर्णय

तेरहवीं पर पौधारोपण कर समाज में दिया गया नया संदेश

तेरहवीं पर पौधारोपण कर समाज में दिया गया नया संदेश फिजूलखर्ची छोड़ समाजोपयोगी कार्यों को बढ़ावा देने की पहल मोहनिया शहर. स्थानीय थाना अंतर्गत दादर गांव में कुशवाहा समाज के लोगों ने मृत्युभोज को सामाजिक कुरीति बताते हुए इसके खिलाफ ऐतिहासिक पहल कर समाज को एक नयी दिशा देने का कार्य किया है. स्मृतिशेष बिरेंद्र कुमार सिंह के पुत्र अमित कुमार मौर्य व अजीत कुमार मौर्य द्वारा पिता के निधन के बाद समाज व परिवार के लोगों की बैठक आयोजित की गयी, जिसमें सर्वसम्मति से तेरहवीं पर मृत्युभोज नहीं करने का निर्णय लिया गया.मालूम हो कि 13 दिसंबर को बिरेंद्र कुमार सिंह का निधन हो गया था व 14 दिसंबर को उनके पैतृक गांव दादर में उनका अंतिम संस्कार किया गया. इसके उपरांत आयोजित बैठक में यह तय हुआ कि मृत्युभोज के स्थान पर समाजोपयोगी कार्य किये जायेंगे. इसी क्रम में उनकी स्मृति में शुक्रवार को एक राष्ट्रीय वृक्ष बोधि वृक्ष यानी पीपल का रोपण किया गया, जो पर्यावरण संरक्षण व सामाजिक चेतना का प्रतीक बनेगा. यह पहल समाज में व्याप्त फिजूलखर्ची पर रोक लगाने व सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन की दिशा में एक सराहनीय कदम माना जा रहा है. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उपस्थित गांव के पुरुषों व महिलाओं ने इस निर्णय का समर्थन किया. लोगों ने कहा कि मृत्युभोज समाज के लिए एक कुरीति है, जिसे समाप्त किया जाना चाहिए. इसके लिए समाज में व्यापक जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है, जो अब धीरे-धीरे दिखाई देने लगी है.ग्रामीणों ने यह भी सुझाव दिया कि मृत्युभोज में लाखों रुपये खर्च करने के बजाय बच्चों की शिक्षा, पुस्तकालय निर्माण व अन्य सामाजिक कार्यों में धन लगाया जाना चाहिए, ताकि बच्चे शिक्षित होकर परिवार, समाज व देश का नाम रोशन कर सकें. इस अवसर पर पूर्व बीडीसी मनोज कुमार मौर्य, उप मुखिया रामानंद मौर्य, सम्राट अशोक क्लब जिलाध्यक्ष रोहित मौर्य, सरोज कुमार सिंह मौर्य, जंग बहादुर सिंह, राम अवध सिंह, अमरेंद्र सिंह, शिव प्रताप सिंह, उदय प्रताप सिंह, मदन सिंह, सुनील सिंह, अजय मौर्य, अमर मौर्य, गुड़िया मौर्य, सरिता मौर्य, वंदना मौर्य, अनीता मौर्या, रीता सिंह सहित कई गणमान्य लोगों की उपस्थिति रही. इस नेक पहल के पीछे सम्राट अशोक क्लब भारत को प्रेरणा स्रोत बताया गया, जिसने समाज को नयी सोच के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया.

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Author: VIKASH KUMAR

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