Sahyog Shivir : कैमूर जिले में दिव्यांग बच्चों को सरकारी योजनाओं और जरूरी सुविधाओं से जोड़ने की पहल शुरू होने जा रही है. कई बार दिव्यांगता का प्रमाण पत्र नहीं होने के कारण बच्चों को सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने में परेशानी होती है. इसी को ध्यान में रखते हुए अब जिले के अलग-अलग प्रखंडों में विशेष जांच-सह-मूल्यांकन शिविर लगाए जाएंगे. इन शिविरों में छह से 18 वर्ष आयु वर्ग के दिव्यांग बच्चों की मेडिकल बोर्ड के माध्यम से जांच की जाएगी. साथ ही उनकी दिव्यांगता का आकलन कर प्रमाणन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी.
बिहार शिक्षा परियोजना परिषद, कैमूर की ओर से जारी निर्देश के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रखंडवार इन शिविरों का आयोजन किया जा रहा है. खास बात यह है कि जांच के साथ बच्चों को किस तरह के सहायक उपकरण की जरूरत है, इसका भी आकलन किया जाएगा. इसका उद्देश्य बच्चों की जरूरत के अनुसार उन्हें सरकारी सहायता और शैक्षणिक सुविधाओं से जोड़ना है.
15 सितंबर से भभुआ में शुरू होगा शिविर
जिले में दिव्यांगता जांच-सह-मूल्यांकन शिविरों की शुरुआत 15 सितंबर से होगी. पहला शिविर भभुआ प्रखंड में नगर पालिका मध्य विद्यालय, वार्ड नंबर-7 में लगाया जाएगा. इसके बाद 16 सितंबर को रामपुर बीआरसी, 17 सितंबर को चांद बीआरसी, 19 सितंबर को चैनपुर बीआरसी और 21 सितंबर को भगवानपुर वार्ड भवन में शिविर लगेगा.
इसके बाद 22 सितंबर को अधौरा बीआरसी, 23 सितंबर को मोहनियां बीआरसी, 24 सितंबर को कुदरा बीआरसी, 28 सितंबर को दुर्गावती बीआरसी, 29 सितंबर को रामगढ़ बीआरसी और 30 सितंबर को नुआंव बीआरसी में बच्चों की जांच और मूल्यांकन किया जाएगा.
सुबह 11 से दोपहर तीन बजे तक होगी जांच
सभी शिविरों में जांच की प्रक्रिया सुबह 11 बजे से दोपहर तीन बजे तक चलेगी. शिक्षा विभाग ने संबंधित विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को अपने विद्यालय में नामांकित दिव्यांग बच्चों के साथ-साथ पोषक क्षेत्र में रहने वाले अनामांकित छह से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को भी शिविर तक पहुंचाने का निर्देश दिया है.
विभाग का कहना है कि कोई भी पात्र बच्चा जांच और मूल्यांकन की प्रक्रिया से छूटना नहीं चाहिए. इसके लिए विद्यालय स्तर पर बच्चों और उनके अभिभावकों को शिविर की जानकारी देने की जिम्मेदारी भी तय की गयी है.
प्रमाण पत्र नहीं होने पर भी बच्चे हो सकेंगे शामिल
शिविर में आने वाले बच्चों के साथ आधार कार्ड, दिव्यांगता प्रमाण पत्र और आय प्रमाण पत्र लाने को कहा गया है. हालांकि, किसी बच्चे के पास इनमें से जरूरी प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं है, तो भी उसे शिविर में शामिल होने से वंचित नहीं किया जाएगा.
ऐसे बच्चों के मामले में संबंधित प्रधानाध्यापक को यह प्रमाणित करना होगा कि बच्चा उनके विद्यालय में नामांकित है या संबंधित विद्यालय के पोषक क्षेत्र का रहने वाला है. इसके आधार पर बच्चे को शिविर में जांच और मूल्यांकन का अवसर दिया जा सकेगा.
जरूरत के अनुसार सहायक उपकरण का होगा आकलन
शिविर में केवल दिव्यांगता की जांच और प्रमाणन ही नहीं होगा, बल्कि बच्चों की जरूरत के अनुसार सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए भी मूल्यांकन किया जाएगा. इसके लिए आनंद कुमार मिश्रा और मुकेश कुमार सिंह से समन्वय करने का निर्देश दिया गया है.
शिविर में प्रखंड साधनसेवी और अन्य संबंधित कर्मी भी मौजूद रहेंगे. ये कर्मी बच्चों और उनके अभिभावकों को आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराने में सहयोग करेंगे.
दो दिन पहले पूरी करनी होगी तैयारी
शिक्षा विभाग ने संबंधित अधिकारियों और कर्मियों को निर्देश दिया है कि शिविर शुरू होने से दो दिन पहले सभी जरूरी तैयारियां पूरी कर ली जाएं. इससे मेडिकल जांच, मूल्यांकन और प्रमाणन की प्रक्रिया निर्धारित समय में व्यवस्थित तरीके से पूरी की जा सकेगी.
विभाग की कोशिश है कि शिविर में अधिक से अधिक पात्र बच्चों की जांच हो और किसी बच्चे को केवल जानकारी या प्रमाण पत्र के अभाव में प्रक्रिया से बाहर न रहना पड़े.
प्रधानाध्यापकों को बच्चों तक जानकारी पहुंचाने का निर्देश
इस संबंध में संभाग प्रभारी हरि नारायण ओझा ने बताया कि सभी प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने विद्यालय में नामांकित और पोषक क्षेत्र में रहने वाले अनामांकित छह से 18 वर्ष के दिव्यांग बच्चों को शिविर की जानकारी दें. साथ ही उन्हें निर्धारित तिथि पर प्रखंडवार जांच कैंप में पहुंचाना सुनिश्चित करें.
उन्होंने बताया कि शिविर में बच्चों की दिव्यांगता की जांच की जाएगी और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद दिव्यांगता प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने की दिशा में कार्रवाई होगी. इसके साथ ही बच्चों को जरूरी सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए उनकी जरूरत का भी आकलन किया जाएगा.
