Kaimur News : मुआवजा नहीं मिलने के कारण वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य रोका

भारत माला परियोजना के तहत वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य जमीन मालिकों द्वारा शुरू होने के साथ ही रोक दिया गया है

भभुआ कार्यालय. भारत माला परियोजना के तहत वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य जमीन मालिकों द्वारा शुरू होने के साथ ही रोक दिया गया है. बगैर मुआवजा के भुगतान किये व भुगतान में हो रहे विलंब के कारण जमीन मालिकों द्वारा अधिग्रहित किये जाने वाली जमीन पर काम करने से रोक दिया गया है. जमीन मालिकों का कहना है कि बगैर मुआवजा के भुगतान किये वह एक्सप्रेस में निर्माण में लगी एजेंसी को अपनी जमीन पर काम करने नहीं देंगे. जमीन मालिकों ने स्पष्ट रूप से कहा कि एनएचएआइ पहले जमीन के मुआवजे का भुगतान करें, उसके बाद उनकी जमीन पर काम करना शुरू करें. ऐसा नहीं हो सकता है कि जमीन मालिक को उसकी जमीन के मुआवजे का बगैर भुगतान किये निर्माण एजेंसी काम करने लगेगी और फिर जमीन का मालिक मुआवजे के लिए दर-दर की ठोकर खायेगा. यह हम जमीन मालिकों को कतई मंजूर नहीं है. मालूम हो कि अभी एक महीने पहले ही तत्कालीन डीएम सावन कुमार द्वारा लगातार किसानों से वार्ता कर उन्हें भुगतान को लेकर आश्वस्त करने के बाद निर्माण एजेंसी से कार्य शुरू करा दिया गया था, लेकिन अभी एक महीना भी काम शुरू हुए नहीं हुआ था कि जमीन मालिकों ने अब यह कहते हुए काम को रोक दिया है कि उनकी जमीन को एनएचएआइ द्वारा कब्जे में लेते हुए उस पर काम शुरू कर दिया गया है, लेकिन काम शुरू होने के एक महीने बाद भी किसानों के खाते में मुआवजे की राशि नहीं आयी है. जमीन मालिक दोनों तरफ से मारे जा रहे हैं, एक तरफ उनकी जमीन भी उनके हाथ से निकल गयी और निर्माण एजेंसी द्वारा उसे अपने कब्जे में लेकर उस पर साफ-सफाई व दोनों तरफ नाला निर्माण का काम शुरू करा दिया गया. वहीं, दूसरी तरफ किसानों को मुआवजे की राशि भी नहीं मिली है. ऐसा नहीं होने दिया जायेगा, अगर किसानों के खाते में जमीन मुआवजे की राशि नहीं आती है, तो कम से कम किसान उस जमीन पर खेती कर अपना जीविकोपार्जन कर सकें, इसलिए काम को रुकवा दिया गया है. किसान संघर्ष मोर्चा के महासचिव पारसनाथ सिंह ने कहा कि जिन गांवों में निर्माण एजेंसी द्वारा काम शुरू किया गया है वहां पर अभी काम रोक दिया गया है. आगामी 10 जुलाई तक वहां के जमीन मालिकों के खाते में मुआवजे की राशि नहीं आती है, तो वहां के किसान इस वर्ष अपने खेत में धान की फसल लगाने का काम करेंगे, यह निर्णय हम जमीन मालिकों द्वारा लिया गया है. = पांच गांव में निर्माण एजेंसी ने शुरू किया गया था काम वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे का कैमूर जिले में निर्माण कार्य में लगी पीएनसी कंपनी द्वारा भभुआ प्रखंड के पांच गांव में काम शुरू किया गया था, जिन पांच गांव में काम शुरू हुआ था वह गांव बेतरी, गोड़हन, ढ़ड़निया, दुमदुम और सींवो है. उक्त गांव में निर्माण एजेंसी द्वारा रूट लाइनिंग, जमीन की सफाई व अधिग्रहित किये गये 70 मीटर चौड़े जमीन के दोनों तरफ नाला बनाने का काम शुरू किया गया था. लेकिन इसी बीच मुआवजा मिलने में हो रहे विलंब के कारण उक्त काम को जमीन मालिकों द्वारा रुकवा दिया गया है. = कैमूर जिले में तीन पैकेज में होगा एक्सप्रेसवे का निर्माण वाराणसी से रांची होते कोलकाता तक एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 610 किलोमीटर है. कैमूर जिले में यह सड़क 52 किलोमीटर लंबी होगी. यह जिले के चांद, चैनपुर, भगवानपुर भभुआ और रामपुर से होकर गुजरेगी. कैमूर जिले में 52 किलोमीटर की एक्सप्रेसवे निर्माण के लिए तीन पैकेज बनाये गये. पहले पैकेज में चांद प्रखंड का 5 किलोमीटर आता है. दूसरे पैकेज में चांद, चैनपुर व भभुआ प्रखंड का 27 किलोमीटर आता है. तीसरे पैकेज में भगवानपुर व रामपुर प्रखंड का 20 किलोमीटर आता है. अभी पैकेज दो यानी चाद, चैनपुर व भभुआ में 27 किलोमीटर में काम करने वाली कंपनी पीएनसी द्वारा भभुआ प्रखंड के पांच गांव में काम शुरू किया गया था. पैकेज दो में 27 किलोमीटर एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए 810 करोड रुपये की प्रस्तावित राशि है. एक्सप्रेसवे के लिए कैमूर जिले में 619 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जायेगा. कैमूर में कुल 72 मौजा के 2948 जमीन मालिकों से जमीन का अधिग्रहण किया जाना है. = क्या कहते हैं पदाधिकारी जिला भू-अर्जन पदाधिकारी संजीव कुमार सज्जन ने बताया कि जमीन मालिकों द्वारा मुआवजा भुगतान को लेकर काम रोका गया है. लगभग 100 किसानों का करीब 18 करोड़ रुपये भुगतान किया गया है, अन्य किसान जिनकी जमीन पर काम लगा है उनके भुगतान के लिए प्रक्रिया काफी तेजी से की जा रही है. बहुत जल्द उनके खाते में पैसा चला जायेगा. अगले एक-दो दिन में फिर से काम शुरू हो जायेगा.

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