भभुआ (नगर) : सरकारी स्कूलों के गुरुजी के लिए अच्छी खबर नहीं है. एमडीएम चावल के खाली बोरे अब वे अपने घर के उपयोग में नहीं ला सकेंगे. अब विभाग एक बोरे को 10 रुपये में बेच कर दफ्तर का खर्चा चलायेगा. सरकार ने ऐसा निर्णय राजस्व को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए किया है.
एमडीएम निदेशक ने जिला मध्याह्न भोजन योजना के प्रभारी पदाधिकारी को पत्र भेज स्कूलों में आपूर्ति किये जाने वाले एमडीएम के चावल के खाली बोरे को संग्रहित कर उसे 10 रुपये की दर से बेच रोकड़ पंजी में अंकित करने को कहा है. उक्त राशि दफ्तर के प्रबंधन, अनुश्रवण, मूल्यांकन सहित अन्य मद में इस्तेमाल किया जायेगा, ताकि ढांचागत संसाधनों को और अधिक मजबूत किया जा सके. निदेशक ने कहा है कि सुगमता को ध्यान में रखते हुए अब केंद्रीयकृत रसोई घर से प्रति खाली बैग 10 रुपये काट कर एसएफसी द्वारा भुगतान किया जायेगा.
सूत्रों की माने तो एमडीएम चावल की आपूर्ति एसएफसी से खरीद कर एजेंसियों के माध्यम से स्कूलों में की जाती है, जिसमें बोरा का भी दाम शामिल रहता है. चावल के उपयोग होने के बाद हेडमास्टर उक्त बोरे को निजी काम में उपयोग करते हैं. इससे विभाग को बड़े पैमाने पर राजस्व का नुकसान उठाना पड़ता है.
आम के आम गुठलियों के दाम
आम के आम गुठलियों के दाम एमडीएम विभाग इस कहावत को चरितार्थ करने में लगा है. बोरे की बिक्री के बाद अनुश्रवण के खर्च की भरपाई की जायेगी. जिले के 1203 विद्यालयों में संचालित एमडीएम योजना के खाली बोरे की बिक्री करने की कवायद निदेशक के निर्देश पर शुरू हो गयी है.
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (एमडीएम) अमेरिका प्रसाद ने बताया कि एमडीएम निदेशक के निर्देश के आलोक में जिले में संचालित योजना के अंतर्गत आने वाले चावल व अन्य सामग्री के खाली बोरों की बिक्री का कार्य शुरू किया गया है. उन्होंने बताया कि जिले के 1203 विद्यालयों में एमडीएम योजना का संचालन विभागीय निर्देश के आलोक में किया जा रहा है.
1203 विद्यालयों में से 39 विद्यालयों में एनजीओ के माध्यम से एमडीएम की आपूर्ती सुनिश्चित की जा रही है. बिक्री के उपरांत प्राप्त राशि को एमडीएम के खाता में जमा कर उसे एमडीएम पंजी में दर्ज कर उपयोग कार्यक्रम पदाधिकारी द्वारा अनुश्रवण के कार्य में खर्च किया जायेगा. साथ ही बोरे की बिक्री के बाद राशि को एमडीएम के अकाउंट में जमा करने के बाद उसे विद्यालय की पंजी में दर्ज किया जायेगा.
