बस स्टैंड को लेकर एक कदम भी आगे नहीं बढ़ी बात

भभुआ नगर : पिछले पांच सालों से शहर के विद्युत विभाग व जिला जज आवास के समीप अवैध रूप से बने सवारी वाहन स्टैंड को हटाने के लिए बैठकों और बातचीत का दौर चलता आ रहा है. लेकिन, उक्त स्थान से स्टैंड को हटवाने की हिम्मत कोई नहीं दिखा सका. पांच वर्ष पूर्व ही नगर […]

By Prabhat Khabar Print Desk | April 24, 2019 8:27 AM

भभुआ नगर : पिछले पांच सालों से शहर के विद्युत विभाग व जिला जज आवास के समीप अवैध रूप से बने सवारी वाहन स्टैंड को हटाने के लिए बैठकों और बातचीत का दौर चलता आ रहा है. लेकिन, उक्त स्थान से स्टैंड को हटवाने की हिम्मत कोई नहीं दिखा सका.

पांच वर्ष पूर्व ही नगर पर्षद ने सुवरन नदी के पश्चिम खाली पड़ी जमीन में स्टैंड का नाम देकर विद्युत विभाग के पास लगने वाले सवारी वाहन चालकों को खड़ा करने का निर्देश जारी किया था. लेकिन, नगर पर्षद ने अब तक वहां व्यवस्था तो दूर एक शेड तक का निर्माण नहीं करवा सकी. इसके चलते सवारी वाहनों के चालक भी कोई व्यवस्था न होती देख पुराने ही जगह से अपनी वाहन चला रहे हैं.
हाल में एसडीओ जन्मेजय शुक्ला के नेतृत्व में जब शहर में ऑटो व ई रिक्शा चालकों से अधिक टैक्स को लेकर बैठक हुई थी, तो उस बैठक में भी सुवरन नदी के समीप से वाहन चलवाने की चर्चा हुई थी और इस पर सभी अधिकारियों का निर्णय भी हुआ था. लेकिन, नगर पर्षद के सुस्त रवैये और पटेल चौक और उसके आसपास अवैध स्टैंडों से बन रही इस गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं देने की वजह से एसडीओ के बैठक में लिये गये निर्णय भी हवा हवाई हो गये.
पटेल चौक पर लाखों रुपया खर्च कर रेडिमेड कपड़े का धंधा किये रणजीत कुमार कहते हैं कि नगर पर्षद को इस पर ध्यान देना चाहिए. क्योंकि, अवैध रूप से वाहन लगे रहने के चलते ग्राहक नहीं आ पाते हैं. वहीं होटल व्यवसायी रोहित का कहना था कि नगर पर्षद हो या जिला प्रशासन उनको अपने स्तर से इस समस्या को सुलझाना चाहिए. क्योंकि, ये आम पब्लिक के वश की बात नहीं है. अक्सर होटल के सामने खड़े सवारियों वाहनों को हटाने के लिए कहने पर वह आंखे तड़ेरने लगते हैं.
पुलिस बनी रहती है मूकदर्शक‍ !
शहर को जाममुक्त कराने के लिए नगर पर्षद और पुलिस व परिवहन विभाग पिछले पांच साल से लगातार योजनाएं बनाते और बैठकें करते आ रहा हैं. इस बीच भभुआ व मोहनिया के चौक चौराहों पर ट्रैफिक इंस्पेक्टर के साथ ट्रैफिक को व्यवस्थित रखने के लिए सिपाहियों, होमगार्ड व हेड कांस्टेबिलों की संख्या भी बढ़ायी गयी. लेकिन नतीजा सिफर रहा.
कारण योजनाओं का सही से क्रियान्वयन न होना हैं. क्योंकि, प्लान बनने के शुरुआती दो-चार दिन तो उसका असर शहर में खूब दिखता है, लेकिन इसके बाद वही ढाक के तीन पात जैसी स्थिति हो जाती है. ट्रैफिक कर्मी अपने लापरवाह अंदाज में आ जाते हैं. उन्हें देखने से स्पष्ट प्रतित होता है कि जाम लगता है तो लगने दो.
उनका इससे क्या वास्ता. मोहनिया का स्टूवरगंज हो या फिर भभुआ का पटेल व जेपी चौक, एकता चौक, इन स्थानों पर पुलिस के जवानों के रहने के बावजूद उनके सामने ही ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए वाहन खड़े रहते हैं या खड़े कर दिये जाते हैं. लेकिन वहां तैनात जवान उन पर कार्रवाई न कर सिर्फ मूकदर्शक बने रहते हैं.

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