Jehanabad News : मखदुमपुर प्रखंड के अंचल अमीन अनिल कुमार के बुधवार को निगरानी विभाग की टीम द्वारा रिश्वत लेते गिरफ्तार किए जाने के बाद जिले में भ्रष्टाचार एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है. पिछले 15 वर्षों के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो पुलिस, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, खनन, आईसीडीएस, ब्लॉक और अंचल कार्यालय समेत कई विभागों के 16 भ्रष्ट लोकसेवकों को निगरानी विभाग रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर चुका है.
2010 से लगातार होती रही निगरानी की कार्रवाई
वर्ष 2010 के आसपास जिला कृषि पदाधिकारी रामगोपाल पांडेय को कृषि भवन निर्माण में कमीशन लेने के आरोप में निगरानी ने गिरफ्तार किया था. इसके कुछ ही समय बाद तत्कालीन जेल अधीक्षक अरविंद मिश्रा भी रिश्वत लेते पकड़े गए. इसके बाद परसबिगहा थाने में पदस्थापित एसआई हितलाल दास, रतनी अंचल के सीआई सिंटू पासवान और तत्कालीन सिविल सर्जन आदेशचंद्र श्रीवास्तव भी अलग-अलग मामलों में निगरानी के हत्थे चढ़े.
स्वास्थ्य, आईसीडीएस और पुलिस विभाग के अधिकारी भी नहीं बचे
वर्ष 2019 में रतनी प्रखंड की आईसीडीएस पर्यवेक्षिका रूबी कुमारी को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया. इसके अलावा सिविल सर्जन कार्यालय के प्रधान लिपिक अनिल कुमार भी ट्रांसफर-पोस्टिंग के नाम पर घूस लेते पकड़े गए. वर्ष 2022 में घोसी थाना के एएसआई उपेंद्र प्रसाद मेहता, काको के तत्कालीन सीओ दिनेश कुमार और पुलिस भवन निर्माण विभाग के सहायक अभियंता अब्दुल रकीब भी निगरानी की कार्रवाई का शिकार बने.
2023 और 2025 में भी लगातार हुई कार्रवाई
वर्ष 2023 में मोदनगंज प्रखंड के विशेष सर्वेक्षण अमीन मोहम्मद सद्दाम आलम को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया. वर्ष 2025 में निगरानी ने तीन बड़ी कार्रवाई करते हुए रतनी प्रखंड के नाजीर दिनेश कुमार प्रभाकर और प्रमुख पति मोहम्मद बबन, जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय के प्रधान लिपिक लक्ष्मण कुमार यादव, सदर अंचल के राजस्व कर्मचारी अविनाश कुमार और काको अंचल के डाटा एंट्री ऑपरेटर सतीश कुमार को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया. इसी वर्ष पुलिस कार्यालय में पदस्थापित डीएसपी मुख्यालय संजीव कुमार के आवास पर आय से अधिक संपत्ति के मामले में विशेष निगरानी इकाई ने छापेमारी भी की थी.
ताजा कार्रवाई से फिर खुली भ्रष्टाचार की परत
बुधवार को मखदुमपुर प्रखंड के अंचल अमीन अनिल कुमार के रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद जिले में भ्रष्टाचार को लेकर फिर बहस तेज हो गई है. लगातार कार्रवाई के बावजूद विभिन्न विभागों में रिश्वतखोरी की घटनाएं सामने आ रही हैं. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि निगरानी विभाग की लगातार कार्रवाई के बाद भी भ्रष्ट लोकसेवक अपनी कार्यशैली में सुधार क्यों नहीं कर रहे हैं.
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