गुरु पूर्णिमा पर बाबा सिद्धनाथ मंदिर में 20 हजार श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक

गुरु पूर्णिमा पर जिले के ऐतिहासिक प्राकृतिक छटाओं से परिपूर्ण वाणावर पहाड़ी स्थित बाबा सिद्धनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं के दिन उमड़ गयी.

मखदुमपुर. गुरु पूर्णिमा पर जिले के ऐतिहासिक प्राकृतिक छटाओं से परिपूर्ण वाणावर पहाड़ी स्थित बाबा सिद्धनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं के दिन उमड़ गयी. गुरुवार की सुबह 6 बजे से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की काफी भीड़ देखी गयी. मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगा रहा. श्रद्धालु पहाड़ी इलाका के हथियाबोर, पातालगंगा एवं बावन सीढ़िया इलाके में बने जल स्रोत से स्नान कर पहाड़ की चोटी पर स्थित बाबा सिद्धनाथ मंदिर पहुंचे, जहां श्रद्धालुओं ने बाबा सिद्धनाथ पर जलाभिषेक कर पूजा अर्चना किया. इस दौरान बोल बम हर हर महादेव की जय घोष से पहाड़ी इलाका गूंजता रहा. वहीं भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन के द्वारा सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किये गये थे. स्थानीय थाने से पुलिस बल के जवान एवं दंडाधिकारी लगाये गये थे. इस बाबत मंदिर के प्रबंधक भानु प्रताप उर्फ गुड्डू सिंह ने बताया कि गुरु पूर्णिमा के अवसर पर लगभग 20 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया है. बताते चलें कि सावन का महीना शुक्रवार से शुरू रहा है. वहीं जिला प्रशासन के द्वारा श्रावणी मेला आयोजित किया गया है. गुरु पूर्णिमा केवल शास्त्रों का नहीं देती ज्ञान, बल्कि आत्मा को जाग्रत कर मोक्ष का सिखाती है मार्ग : धीरेंद्र कुर्था. गुरु पूर्णिमा केवल शास्त्रों का ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि आत्मा को जाग्रत कर मोक्ष का मार्ग भी सिखाते हैं. उक्त बातें कुर्था गायत्री शक्ति पीठ में श्रद्धालुओं को गुरु पूर्णिमा के महत्त्ता को बताते हुए शांतिकुंज हरिद्वार के प्रतिनिधि धीरेंद्र नाथ पटेल ने कही. उन्होंने कहा कि गुरु के बिना किसी भी शिष्य की आध्यात्मिक उन्नति अधूरी मानी जाती है. गुरु पूर्णिमा न केवल एक धार्मिक पर्व है, बल्कि यह आध्यात्मिक साधना और आत्मचिंतन का अवसर होता है। इस दिन साधु-संत, योगी और साधक विशेष तप और ध्यान करते हैं. वहीं गृहस्थ लोग अपने माता-पिता, शिक्षक या जीवन में मार्गदर्शन देने वाले किसी भी व्यक्ति को गुरु मानकर उनका सम्मान करते हैं. प्राचीन दिन गुरुकुलों, आश्रमों और धार्मिक स्थलों पर गुरु पूजन, यज्ञ, भजन और प्रवचन का आयोजन किया जाता है. शिष्य अपने गुरु को पुष्प, वस्त्र, फल और मिठाई अर्पित कर उनका आशीर्वाद लेते हैं. यह दिन गुरु और शिष्य के बीच विश्वास और समर्पण के अटूट बंधन को दर्शाती है.

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Author: AMLESH PRASAD

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