जहानाबाद: वाणावर में 19वां मगही चौपाल आयोजित, संविधान की अष्टम अनुसूची में मगही को शामिल कराने की उठी मांग

ऐतिहासिक वाणावर में 19वें मगही चौपाल का आयोजन हुआ. यहां मगही भाषा को संविधान की अष्टम अनुसूची में शामिल कराने और आगामी जनगणना में मातृभाषा के रूप में दर्ज कराने की जोरदार मांग की गई. कार्यक्रम में मगही प्रेमियों ने भाषा के संरक्षण, संवर्धन और सम्मान पर बल दिया.

Jehanabad Magahi Chaupal: जिले के मखदुमपुर प्रखंड के ऐतिहासिक वाणावर में रविवार को 19वां मगही चौपाल आयोजित किया गया. कार्यक्रम में मगही भाषा को भारतीय संविधान की अष्टम अनुसूची में शामिल कराने तथा आगामी जनगणना में मातृभाषा के रूप में मगही दर्ज कराने की मांग उठाई गई. चौपाल में साहित्यकारों, शिक्षकों, कलाकारों, शोधकर्ताओं एवं मगही प्रेमियों ने एक स्वर में मगही भाषा के संरक्षण, संवर्धन और सम्मान की बात कही. कार्यक्रम की अध्यक्षता अशोक प्रियदर्शी ने की, जबकि मंच संचालन गौतम परासर ने किया.

मगही वंदना से हुई कार्यक्रम की शुरुआत

कार्यक्रम की शुरुआत संगीत शिक्षक अविनाश कुमार उर्फ मुन्ना दीवाना द्वारा प्रस्तुत मगही वंदना से हुई. इसके बाद विभिन्न वक्ताओं और कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों और विचारों से चौपाल को जीवंत बना दिया. मगध के इतिहास पर शोध करने वाले सन्नी कुमार कश्यप ने वाणावर के ऐतिहासिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने क्षेत्र के इतिहास, संस्कृति और विरासत से लोगों को अवगत कराया. वहीं संगीत शिक्षक ने सिद्धेश्वर नाथ से संबंधित मगही गीत प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय एवं मगहीमय बना दिया.

भाषा और लोक परंपराओं से जोड़ने पर जोर

सेवानिवृत्त शिक्षक सुधाकर राजेंद्र ने मगही चौपाल के उद्देश्य और इसकी भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे आयोजन भाषा, संस्कृति और लोक परंपराओं को लोगों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं. सेवानिवृत्त शिक्षक रामध्यान ने अपने खास अंदाज में बच्चों को मगही पढ़ाने का संदेश दिया और लोकगीत के माध्यम से लोगों को अपनी मातृभाषा से जुड़ने के लिए प्रेरित किया. कार्यक्रम में नाल वादक अशोक और झाल वादक सुदामा ने अपनी कला से माहौल में लोक संस्कृति का रंग भर दिया.

जनगणना में मातृभाषा के रूप में मगही दर्ज कराने की अपील

मगही के प्रोफेसर नंदकिशोर सिंह विद्यार्थी ने मगही लोकगीत के माध्यम से मगही भाषा की उपेक्षा पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब मगही को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए. मगही विकास मंच के सचिव अरविंद आजांस ने मगही भाषा के विकास के साथ-साथ आगामी जनगणना में मातृभाषा के कॉलम में मगही दर्ज कराने पर विशेष जोर दिया. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने घर-परिवार और समाज में मगही भाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाएं. हेमान्शु शेखर ने कहा कि अपने सभी बच्चों को मगही जरूर पढ़ाएं. उन्होंने मातृभाषा के संरक्षण को नई पीढ़ी से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया.

लोकगीत और नाटक से दिया सामाजिक-सांस्कृतिक संदेश

शिक्षक मणिकांत मणि ने अपने मगही लोकगीत के माध्यम से मगही भाषा की ऐतिहासिक व्यापकता को रेखांकित किया और कहा कि जब मगही भाषा का बोलबाला था, तब भारत अखंड था. मगही के जाने-माने नाटककार धर्मेंद्र ने अपने नाटक के माध्यम से कार्यक्रम में सामाजिक एवं सांस्कृतिक संदेश दिया और मगही चौपाल की शोभा बढ़ाई.

मगही को संविधान की अष्टम अनुसूची में शामिल कराने का संकल्प

वाणावर की ऐतिहासिक धरती पर आयोजित 19वें मगही चौपाल में गीत, संगीत, लोककला, इतिहास और भाषा के प्रति जागरूकता का अनूठा संगम देखने को मिला. चौपाल के माध्यम से उपस्थित लोगों ने संकल्प लिया कि मगही भाषा को जन-जन तक पहुंचाने, नई पीढ़ी को मगही से जोड़ने और मगही को संविधान की अष्टम अनुसूची में शामिल कराने की मांग को मजबूती से उठाने के लिए लगातार प्रयास किया जाएगा.


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By Ashok Jehanabad

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