जहानाबाद में मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना से गरीब परिवारों को बड़ी राहत, 51 बच्चों के दिल का हुआ मुफ्त ऑपरेशन

Jehanabad News: जहानाबाद जिले में मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के तहत अब तक 51 जन्मजात हृदय रोगी बच्चों का सरकारी खर्च पर सफल ऑपरेशन किया जा चुका है. शून्य से 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए संचालित इस योजना के तहत दिल में छेद जैसी गंभीर बीमारियों का पूरा खर्च सरकार उठाती है.

Jehanabad News: (संजय अनुराग की रिपोर्ट) जिले में मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना गरीब परिवारों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है. इस योजना के तहत अब तक 51 जन्मजात हृदय रोगी बच्चों का सरकारी खर्च पर हार्ट का ऑपरेशन किया गया है. इसके अलावा योजना के चालू होने से अब तक जिले में ऐसे 2,317 ह्रदय रोगी बच्चों का मुफ्त इलाज किया गया है. इनमें से 1,565 बच्चों का इलाज अहमदाबाद के सत्य साईं हृदय अस्पताल में कराया गया है.

0 से 18 साल तक के बच्चों का होता है मुफ्त इलाज

मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के तहत शून्य से 18 साल तक के जन्मजात हृदय रोगी बच्चों का सरकारी खर्च पर मुफ्त इलाज कराया जाता है. अगर जरूरत होती है तो उन बच्चों के हृदय का मुफ्त ऑपरेशन भी किया जाता है. ऐसे बच्चे जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित होते हैं और उनके हृदय में जन्म से ही छेद होता है या कोई अन्य हृदय संबंधी परेशानी होती है. इसके कारण जन्म के बाद इन बच्चों में कई प्रकार की अनियमिताएं सामने आती हैं और उनकी तबीयत लगातार खराब रहती है. गरीब परिवार में आर्थिक तंगी के कारण ऐसे बच्चों का सही तरीके से इलाज नहीं हो पाता है, जिससे उनकी जान पर बन आती है. इसी को ध्यान में रखकर सरकार ने यह योजना शुरू की है ताकि कोई भी बच्चा पैसे के अभाव में दम न तोड़े.

आरबीएसके टीम करती है बीमार बच्चों की खोज

योजना के तहत स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें हेल्थ सेंटर पर रेफर किया जाता है. राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत डॉक्टरों, एएनएम और फार्मासिस्ट की टीम आंगनबाड़ी केंद्रों और विभिन्न स्कूलों में समय-समय पर जाकर बच्चों के स्वास्थ्य की जांच करती है. इस दौरान कंजेटियल हार्ट डिजीज यानी सीएचडी (जन्मजात हृदय रोग) वाले बच्चों की खोज की जाती है. चिन्हित बच्चों को पहले सदर अस्पताल लाकर जांच की जाती है. पिछले महीने ही जहानाबाद से ऐसे 12 बच्चों को आगे के इलाज के लिए आईजीआईएमएस पटना भेजा गया था.

आईजीआईएमएस, एम्स और अहमदाबाद में होता है उपचार

जांच में बीमारी की पुष्टि होने के बाद बच्चों को इलाज के लिए आईजीआईएमएस, हृदय रोग संस्थान पटना या एम्स पटना में भेजा जाता है. जिन बच्चों की बीमारी दवाओं से ठीक होने वाली होती है, उनका इलाज आईजीआईएमएस या एम्स में ही किया जाता है. वहीं, जिन बच्चों को दिल के ऑपरेशन की जरूरत होती है, उन्हें अहमदाबाद के सत्य साईं हॉस्पिटल या किसी अन्य बड़े संस्थान में भेजा जाता है. इस पूरे ऑपरेशन में करीब 7 से 8 लाख रुपए का खर्च आता है, जिसे राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत सरकार वहन करती है. बच्चों के इलाज से लेकर उनके आने-जाने, रहने और खाने का सारा खर्च भी सरकार ही उठाती है.

क्या कहते हैं सिविल सर्जन?

मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के तहत जन्मजात हृदय रोगी बच्चों की खोज कर उनका फ्री इलाज किया जाता है. जरूरत पड़ने पर ऑपरेशन के लिए उन्हें राज्य से बाहर भी भेजा जाता है. जिले में अब तक ऐसे 2,317 बच्चों का इलाज और 51 बच्चों का ऑपरेशन किया जा चुका है.

डॉ हरिश्चंद्र चौधरी, सिविल सर्जन, जहानाबाद

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Published by: Nikhil Anurag

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