Jehanabad News: (अशोक कुमार की रिपोर्ट) जिले के रतनी फरीदपुर प्रखंड मुख्यालय के समीप बिहार राज्य शिक्षक संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले शिक्षकों ने एक दिवसीय जोरदार धरना प्रदर्शन किया. इस दौरान शिक्षकों ने जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) और डीपीओ (स्थापना) के खिलाफ जमकर आक्रोश व्यक्त किया. धरने के माध्यम से शिक्षकों ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के नाम संबोधित एक मांग पत्र प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) को सौंपा. इस कार्यक्रम की अध्यक्षता बृजेश कुमार बिभु ने की, जबकि संचालन दानिश अकबर अली एवं रामाधार सिंह ने संयुक्त रूप से किया. इस मोर्चे में बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ (गोप गुट) मूल, बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ और बिहार स्टेट टीचर एसोसिएशन गोप गुट के शिक्षक मुख्य रूप से शामिल हुए.
‘निरीक्षण के नाम पर शिक्षकों में पैदा किया जा रहा है भय’
धरना सभा को संबोधित करते हुए शिक्षक नेताओं ने आरोप लगाया कि जिला शिक्षा कार्यालय में इस समय व्यापक रूप से भ्रष्टाचार कायम है. जिला शिक्षा पदाधिकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के नाम पर सुधार के लिए आवश्यक निर्देश देने के बजाय, निरीक्षण के नाम पर शिक्षकों में भय का माहौल पैदा कर उनका आर्थिक दोहन कर रहे हैं. नेताओं ने सवाल उठाया कि जब शिक्षा देने वाले शिक्षक ही कार्यालय के भ्रष्ट रवैये से डरे और सहमे रहेंगे, तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे संभव होगी? आरोप यह भी है कि जिला शिक्षा पदाधिकारी अपने साथ भ्रष्टाचार में बदनाम जिले के अकाउंटेंट को लेकर विद्यालयों का निरीक्षण करते हैं. मोर्चा के नेताओं को यह भी सूचना मिली है कि डीईओ द्वारा जिले के सभी अकाउंटेंट एवं प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को निरीक्षण के नाम पर वसूली करने का मौखिक आदेश दिया गया है, जिससे सरकार की जीरो करप्शन नीति को पलीता लगाया जा रहा है.
वेतन बकाया, सेवा पुस्तिका और भत्ते में हेराफेरी का आरोप
शिक्षकों ने अपनी समस्याओं को गिनाते हुए कहा कि पिछले एक वर्ष से जिला कार्यालय में शिक्षकों की सेवा पुस्तिका (सर्विस बुक) जमा रखी गई थी, जिसे डीईओ और डीपीओ की मनमानी के कारण बिना कोई ठोस कारण बताए वापस लौटा दिया गया. यही नहीं, विभागीय स्तर पर सभी प्रकार के बकाया वेतन भुगतान करने के राज्य सरकार के सख्त आदेश के बावजूद इसमें बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ और अब तक अधिकांश शिक्षकों का एरियर भुगतान लंबित है. इसके अलावा विशिष्ट शिक्षकों की प्रोन्नति और प्रधान शिक्षकों के वेतन संरक्षण का लाभ देने जैसे महत्वपूर्ण विभागीय आदेशों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है. मनमानी का आलम यह है कि शहरी क्षेत्र के शिक्षकों को जहां 10% आवास भत्ता मिलना चाहिए था, वहां केवल 5% ही दिया जा रहा है और इस संबंध में विधानसभा में पूछे गए प्रश्न की भी गलत जानकारी देकर सरकार को गुमराह किया गया है.
मांगें पूरी नहीं होने पर 5 जून से अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी
शिक्षक नेताओं ने कहा कि जिले में शिक्षकों की 27 सूत्री मांग पत्र को लेकर पूर्व में जिला शिक्षा पदाधिकारी से वार्ता हो चुकी है, लेकिन उनकी तानाशाही के कारण इन मांगों पर कोई प्रगति नहीं हुई. इसी वजह से जिले के सभी प्रखंडों में धरना-प्रदर्शन आयोजित कर मांग पत्र सौंपा जा रहा है. यदि इन समस्याओं का त्वरित निष्पादन नहीं हुआ, तो आगामी 5 जून से जिला शिक्षा कार्यालय के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा. शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन तब तक चलेगा जब तक कि उनकी जायज समस्याओं का निदान नहीं हो जाता और इसकी सारी जवाबदेही डीईओ एवं डीपीओ स्थापना की होगी.
इस धरने में मुख्य रूप से सुदर्शन प्रसाद, राम उदय कुमार, शंभू कुमार, अनिल कुमार, अमरजीत कुमार, नन्द किशोर दास, परमानंद कुमार, राहुल कुमार, देवकांत कुमार, सत्येंद्र कुमार, विजय कुमार, सुरेन्द्र कुमार दिनकर, मुकेश कुमार, उपेंद्र कुमार, नीरज कुमार सहित दर्जनों शिक्षकों ने भाग लिया और अपनी आवाज बुलंद की.
