जहानाबाद जिले के मखदुमपुर नगर पंचायत क्षेत्र में ‘मगध के गांधी’ के नाम से प्रसिद्ध पूर्व मंत्री स्वर्गीय रामाश्रय प्रसाद सिंह की प्रतिमा झाड़ियों के बीच पड़ी मिली. प्रतिमा की ऐसी स्थिति सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी है. लोगों ने महापुरुष की प्रतिमा को सम्मानजनक स्थान नहीं मिलने पर सवाल उठाए हैं.
विकास कार्यों के लिए याद किए जाते हैं रामाश्रय बाबू
रामाश्रय प्रसाद सिंह मखदुमपुर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति के प्रमुख चेहरों में रहे. उन्होंने सड़क, शिक्षा, सिंचाई, नगर विकास और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर लंबे समय तक काम किया. क्षेत्र के लोग उन्हें उनके योगदान के लिए सम्मान के साथ याद करते हैं. ऐसे में उनकी प्रतिमा का झाड़ियों के बीच पड़ा मिलना लोगों को खल रहा है.
तीन-चार साल से निजी भूखंड में पड़ी है प्रतिमा
बताया जाता है कि कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं की पहल पर रामाश्रय प्रसाद सिंह की प्रतिमा तैयार करायी गयी थी. इसे मखदुमपुर प्रखंड कार्यालय के पास स्थापित किया जाना था. हालांकि, प्रतिमा स्थापित करने को लेकर नगर पंचायत और भाकपा माले से जुड़े कार्यकर्ताओं की ओर से विरोध हुआ. इसके कारण प्रतिमा निर्धारित स्थल पर स्थापित नहीं हो सकी.
झाड़ियों में छिप गयी प्रतिमा
स्थापना नहीं होने के बाद प्रतिमा को एक निजी भूखंड में रख दिया गया. देखते ही देखते तीन से चार वर्ष बीत गये, लेकिन प्रतिमा को स्थापित करने के लिए कोई ठोस पहल नहीं हुई. बरसात के दौरान भूखंड में झाड़ियां बढ़ती गयीं और प्रतिमा धीरे-धीरे उन्हीं के बीच ढक गयी.
पूर्व सांसद ने पहुंचकर प्रतिमा को ढका
मामले की जानकारी मिलने पर पूर्व सांसद जगदीश शर्मा मौके पर पहुंचे. प्रतिमा की स्थिति देखकर उन्होंने चिंता जतायी और तत्काल कपड़ा मंगवाकर प्रतिमा को सम्मानपूर्वक ढक दिया. उन्होंने कहा कि महापुरुष किसी एक दल या विचारधारा तक सीमित नहीं होते. उनके योगदान का सम्मान करना समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है.
मुख्यमंत्री से प्रतिमा के लिए सम्मानजनक स्थान की मांग
पूर्व सांसद ने कहा कि वह जल्द मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात कर रामाश्रय बाबू की प्रतिमा को सम्मानजनक स्थान दिलाने की मांग करेंगे. उन्होंने मामले को संवेदनशील बताते हुए प्रशासन से भी उचित पहल की उम्मीद जतायी.
प्रतिमा की दुर्दशा ने खड़े किए सवाल
रामाश्रय प्रसाद सिंह की प्रतिमा के तीन-चार वर्षों तक निजी भूखंड में पड़े रहने को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पंचायत, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को इस मामले में पहले ही पहल करनी चाहिए थी. लोगों ने मांग की है कि प्रतिमा को जल्द उचित स्थान पर स्थापित कर उसका संरक्षण सुनिश्चित किया जाए.
महापुरुषों की विरासत बचाने की जरूरत
महापुरुषों की विरासत केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में समाज और जनप्रतिनिधियों को मिलकर पहल करनी चाहिए. अब लोगों की नजर इस बात पर है कि प्रशासन और नगर पंचायत प्रतिमा को सम्मानजनक स्थान दिलाने के लिए कब कदम उठाते हैं.
