परवल की खेती कर जिले के सैकड़ों किसान संवार रहे अपनी तकदीर

सोन का दियारा परवल की खेती के लिए वरदान साबित हो रही है. किसानों का कहना है कि उनके खेतों से फसल के रूप में सोना उपज रहा है.

By Prabhat Khabar News Desk | February 24, 2025 11:23 PM

अरवल़ सोन का दियारा परवल की खेती के लिए वरदान साबित हो रही है. किसानों का कहना है कि उनके खेतों से फसल के रूप में सोना उपज रहा है. मौसम अनुकूल होने पर इसकी उपज 250 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक होती है. एक एकड़ परवल की खेती पर प्लांटिंग मैटेरियल, खाद एवं क्रॉपिंग लागत को मिलाकर करीब 60 हजार रुपये खर्च होते हैं, जबकि उत्पादन प्रति एकड़ औसतन 100 क्विंटल होता है. यदि यह परवल न्यूनतम 20 रुपये किलो भी बिके तो लागत को छोड़कर लगभग डेढ़ लाख रुपये का मुनाफा होता है. परवल की खेती कर जिले के सैकड़ों किसान अपने तकदीर खुद अपने हाथों से लिख रहे हैं. एक तरफ सोन नदी के बालू सरकारी खजाना भर रहा है तो दूसरी ओर इस बालू पर परवल की खेती कर किसान आर्थिक उन्नति कर रहे हैं. सोन नदी के बालू पर जिले के 200 से अधिक एकड़ में परवल की खेती किसान करते हैं. सबसे ज्यादा खेती परासी, रामपुर वैना,पिपरा बांग्ला, ओझा बीघा के किसान करते हैं. परवल की खेती से किसानों के अलावा स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार भी मिल रहा है. परिवार की खेती करने वाले रामपुर वैना के किसान अमित सिंह, सुरेस सिंह, रमेश वर्मा और अखिलेश सिंह ने बताया कि एक बीघा परवल की खेती करने में 15 से 20 हजार की लागत आती है और मुनाफा 80 हजार से डेढ़ लाख तक होता है. परवल की खेती तकदीर बदलने वाला होता है कम लागत में अच्छी उत्पादन होता है. सोन नदी के बालू पर उगने वाला परवल काफी स्वादिष्ट होने की वजह से बाजार में अधिक मांग रहती है. यहां के परवल भोजपुर, औरंगाबाद और पटना जिले के व्यापारी लेकर जाते हैं. इसकी लतर की रोपाई अक्टूबर महीने में होता है उसके बाद कोड़ाई बालू में हाथ से ही करना पड़ता है. फरवरी के अंतिम सप्ताह या फिर मार्च से फलना शुरू होता है जो बरसात तक चलता है.

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