Jehanabad News: भाकपा-माले के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने मंगलवार को जहानाबाद में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में केंद्र और बिहार सरकार पर शिक्षा, रोजगार, छात्र आंदोलन, शराबबंदी और कानून-व्यवस्था समेत कई मुद्दों को लेकर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि नीट सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं लगातार हो रही हैं, लेकिन सरकार प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रही है.
पेपर लीक रोकने के कानून का नहीं दिख रहा असर
दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि नीट पेपर लीक कोई नई घटना नहीं है. पेपर लीक का सिलसिला वर्षों से जारी है. सरकार ने कानून में संशोधन तो किया, लेकिन उसका जमीनी स्तर पर कोई प्रभाव दिखाई नहीं दे रहा है. उन्होंने कहा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था भी प्रभावी नहीं है और पॉक्सो जैसे कानूनों के तहत हजारों मामले लंबित पड़े हैं.
उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए केवल कमेटियां बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि दोषियों के खिलाफ सख्त और त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए.
छात्र आंदोलन पर सरकार को घेरा
माले महासचिव ने आरोप लगाया कि बिहार में छात्र-युवा आंदोलन के दौरान पुलिस ने गोली चलाई और एके-47 तक का इस्तेमाल किया गया, लेकिन सरकार ने अब तक इसकी जिम्मेदारी नहीं ली. उन्होंने कहा कि नौजवानों की आवाज सुनने के बजाय सरकार दमन की नीति अपना रही है.
उन्होंने कहा कि सरकार को नौजवानों की बात सुननी चाहिए और उन पर गोली चलाने के बजाय शिक्षा और रोजगार के मुद्दों का समाधान करना चाहिए.
मतदान की उम्र 16 वर्ष करने की वकालत
दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि आज के युवा देश और समाज की बेहतर समझ रखते हैं. इसलिए चुनाव सुधार के तहत मतदान की न्यूनतम आयु 18 वर्ष से घटाकर 16 वर्ष करने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए, ताकि युवा लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अधिक सक्रिय भागीदारी निभा सकें.
बांकीपुर का जनादेश पूरे बिहार की आवाज
उन्होंने कहा कि बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव का परिणाम केवल एक सीट का फैसला नहीं है, बल्कि पूरे बिहार की जनता और नौजवानों की भावना का प्रतिबिंब है. उन्होंने भाजपा की हार को जनता के बढ़ते असंतोष का संकेत बताते हुए कहा कि यह जनादेश सरकार के लिए चेतावनी है. साथ ही उन्होंने प्रशांत किशोर को जीत की बधाई भी दी.
अगस्त में तेज होगा छात्र-युवा आंदोलन
दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि अगस्त महीने में बिहार सहित पूरे देश में छात्र-युवा आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा. विश्वविद्यालयों और विभिन्न जिलों में छात्र-युवा संसद का आयोजन होगा, जहां शिक्षा, रोजगार और सरकारी नीतियों पर चर्चा की जाएगी.
उन्होंने नीति आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पिछले दस वर्षों में देशभर में 94 हजार स्कूल बंद हो चुके हैं. ऐसे में सरकार को शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए.
जहानाबाद-अरवल के विकास की उठाई मांग
अपने दौरे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जहानाबाद और अरवल क्षेत्र लंबे समय तक हिंसा और संघर्ष से प्रभावित रहे हैं. आज भी कई इलाकों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है. सरकार को शिक्षा, पेयजल, शौचालय और अन्य आधारभूत सुविधाओं के विकास पर प्राथमिकता से काम करना चाहिए.
शराबबंदी और पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
माले महासचिव ने बिहार पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि शराबबंदी कानून के नाम पर आम लोगों को प्रताड़ित किया जा रहा है, जबकि बड़े शराब माफियाओं पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है. उन्होंने कहा कि पुलिस हिरासत में मौत जैसी घटनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं और ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.
ये रहे मौजूद
संवाददाता सम्मेलन में प्रभारी कुमार परवेज, पूर्व विधायक महानंद सिंह सहित पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे.
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