नक्सलवाद खत्म, पर दंश बरकरार : नमक खरीदने के लिए चोरमारा के ग्रामीणों को जाना पड़ता है 15 किमी दूर

चोरमारा जैसे अति पिछड़ा गांव बुनियादी सुविधाओं के लिए आज भी जूझ रहा है.

बरहट. चोरमारा जैसे अति पिछड़ा गांव बुनियादी सुविधाओं के लिए आज भी जूझ रहा है. हालात ऐसे हैं कि एक हजार से अधिक मतदाताओं वाले इस गांव में उच्च शिक्षा के स्कूल,अस्पताल, पानी ,बिजली ,सड़क ,शौचालय तो छोड़ये यहां रोजमर्रा की जरूरतों के लिए एक भी स्थायी किराना दुकान तक नहीं है. गांव के लोग बताते हैं कि नमक-तेल से लेकर बच्चों के बिस्कुट तक के लिए उन्हें 11 किलोमीटर दूर बरहट प्रखंड मुख्यालय या फिर 15 किलोमीटर दूर लक्ष्मीपुर बाजार का रुख करना पड़ता है. स्थानीय ग्रामीण मनोज कोड़ा, फुलेश्वर कोड़ा और दिनेश कोड़ा कहते हैं कि सिर्फ राशन ही नहीं, छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी गांव से बाहर जाना हमारी मजबूरी है. एक दिन का पूरा समय सिर्फ सामान लाने में ही निकल जाता है. गांव की बदहाल सड़कें इस परेशानी को और बढ़ा देती हैं. पक्की सड़क के अभाव में यहां नियमित यातायात सुविधा नहीं है. एकमात्र निजी वाहन के सहारे लोग समूह बनाकर बाजार जाते हैं, जिससे समय और पैसा दोनों की बर्बादी होती है. कई बार तो जरूरत का सामान लाने के लिए पूरे हफ्ते का इंतजार करना पड़ता है. हालांकि भीम बांध इलाके में एक छोटी दुकान जरूर है. जहां सीमित सामान ही उपलब्ध होता है. ऐसे में यह दुकान ग्रामीणों की जरूरतों को पूरा करने में नाकाफी साबित होती है.

लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों की चपेट में रहा है चोरमारा गांव

गौरतलब है कि चोरमारा गांव लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों की चपेट में रहा है. जिसके कारण विकास की रफ्तार यहां थम सी गयी थी. आज भी गांव मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहा है. हालांकि जिला प्रशासन ने विधानसभा चुनाव के बाद बंद पड़े जन वितरण प्रणाली की दुकान को चालू जरूर कराया है, लेकिन रोजमर्रा की जरूरतों के लिए स्थायी किराना दुकान का अभाव अब भी ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है.

क्या कहते हैं पदाधिकारी

इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी एसके पांडेय ने कहा कि अति पिछड़े क्षेत्रों के समग्र विकास को लेकर सरकार गंभीर है और इसके लिए विशेष योजनाएं तैयार की जा रही हैं. उन्होंने कहा कि चोरमारा गांव को इन योजनाओं के दायरे में लाकर यहां के लोगों को हर संभव लाभ पहुंचाया जाएगा. उन्होंने कहा यह भी कहा कि गांव में किराना दुकान का अभाव एक व्यावहारिक समस्या है. इस मुद्दे पर स्थानीय ग्रामीणों से संवाद स्थापित कर शीघ्र समाधान निकालने की पहल की जाएगी ताकि लोगों को दैनिक जरूरतों के लिए परेशान न होना पड़े.

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By PANKAJ KUMAR SINGH

PANKAJ KUMAR SINGH is a contributor at Prabhat Khabar.

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