पर्यावरण सप्ताह में पेड़ों पर चली आरी, सोनो में बड़े पैमाने पर कटे यूकेलिप्टस

Jamui Tree Cutting: बीते 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के दिन भी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई जारी रही. बताया जा रहा है कि अब तक सौ से अधिक यूकेलिप्टस के पेड़ काटे जा चुके हैं, जबकि कई अन्य पेड़ों की कटाई की प्रक्रिया अभी भी जारी है.

जमुई के सोनो से बिनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट:

Jamui Tree Cutting: एक ओर जहां पूरे देश में विश्व पर्यावरण दिवस और पर्यावरण सप्ताह के दौरान पौधारोपण तथा पर्यावरण संरक्षण के संदेश दिए जा रहे हैं, वहीं जमुई जिले के सोनो प्रखंड क्षेत्र में बड़ी संख्या में यूकेलिप्टस के पेड़ों की कटाई ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. प्रखंड अंतर्गत पैनवाजन और पंच पहाड़ी के बीच सोनो-झाझा मुख्य सड़क के समीप सैकड़ों पेड़ों की कटाई किए जाने की सूचना सामने आई है.

स्थानीय लोगों के अनुसार बीते 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के दिन भी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई जारी रही. बताया जा रहा है कि अब तक सौ से अधिक यूकेलिप्टस के पेड़ काटे जा चुके हैं, जबकि कई अन्य पेड़ों की कटाई की प्रक्रिया अभी भी जारी है. कटे हुए पेड़ों के तनों को छोटे-छोटे हिस्सों में काटकर सड़क किनारे जमा किया गया है, जिन्हें ट्रकों के माध्यम से अन्य स्थानों पर भेजा जा रहा है.

इस मामले को लेकर क्षेत्र में अलग-अलग तरह की चर्चाएं हो रही हैं. कुछ लोगों का दावा है कि पेड़ रैयती जमीन पर लगे थे, इसलिए उनकी कटाई वैध है. वहीं कई स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित इलाके का बड़ा हिस्सा गैरमजरूआ अथवा वन विभाग के अधीन है, ऐसे में जमीन की वास्तविक स्थिति की जांच आवश्यक है.

मामले की जानकारी मिलने पर सोनो अंचलाधिकारी प्रशांत कुमार शांडिल्य ने इसे गंभीरता से लेते हुए संबंधित राजस्व कर्मचारी को स्थल जांच का निर्देश दिया है. उन्हें यह सत्यापित करने को कहा गया है कि जिस भूमि पर पेड़ों की कटाई की गई है, वह रैयती भूमि है अथवा सरकारी श्रेणी की जमीन.

वन विभाग ने क्या कहा

स्थानीय वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिन पेड़ों की कटाई की जा रही है, वे रैयती जमीन पर स्थित हैं. स्थानीय फॉरेस्टर अनुपम कुमार ने बताया कि मुख्य सड़क से लगभग 50 फीट तक वन विभाग की भूमि है और उस क्षेत्र के पेड़ों को नहीं काटा गया है. उन्होंने कहा कि संबंधित पेड़ों की कटाई के लिए भूमि स्वामी द्वारा आवश्यक अनुमति प्राप्त की गई है.

पर्यावरण संरक्षण को लेकर उठे नैतिक सवाल

हालांकि पेड़ों की कटाई वैध या अवैध होने का फैसला जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा, लेकिन पर्यावरण दिवस और पर्यावरण सप्ताह के दौरान इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई को लेकर स्थानीय बुद्धिजीवियों और पर्यावरण प्रेमियों ने चिंता जताई है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज, जनप्रतिनिधियों और भूमि स्वामियों की भी नैतिक जिम्मेदारी बनती है. उनका मानना है कि पर्यावरण सप्ताह के दौरान पेड़ों की कटाई से बचा जा सकता था और इसके स्थान पर नए पौधे लगाने को बढ़ावा दिया जाना चाहिए था.

फिलहाल प्रशासन जमीन की प्रकृति और कटाई की वैधता की जांच में जुटा है. जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.

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Published by: Shruti Kumari

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