बिहार में उद्यमियों को मिलेगी 5 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी, पूर्वी भारत का बनेगा इंडस्ट्रियल हब, मिलेगा बंपर रोजगार

Industry In Bihar: बिहार में उद्यमियों को करोड़ों रुपये सब्सिडी देने की तैयारी की गई है. राज्य में एक करोड़ रोजगार, एक करोड़ एमएसएमई और हर जिले में इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की तैयारी की गई है. इस तरह से निवेश को बढ़ावा देने को लेकर सरकार की ओर से प्लानिंग की गई है.

Industry In Bihar: बिहार में उद्योग को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है. इसी क्रम में राज्य को पूर्वी भारत का प्रमुख औद्योगिक और विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 'बिहार एमएसएमई नीति-2026' सार्वजनिक कर दी गई है. नीति के मसौदे में अगले पांच सालों के लिए कई महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए गए हैं.

इनमें एक करोड़ एमएसएमई यूनिट्स का फॉरमल रजिस्ट्रेशन, एक करोड़ से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन, 500 एमएसएमई यूनिट्स को वैश्विक वैल्यू चेन से जोड़ना, हर साल एक लाख उद्यमियों को इंडस्ट्री 4.0 की ट्रेनिंग देना और कोसी, भागलपुर, मुंगेर और पूर्णिया में चार टेक्नोलॉजी और एक्सटेंशन सेंटर स्थापित करना शामिल है.

किसे-कितनी मिलेगी सब्सिडी?

जानकारी के मुताबिक, नीति में निवेशकों के लिए बड़े वित्तीय प्रोत्साहन का प्रस्ताव रखा गया है. बी कैटेगरी के जिलों में उद्योग लगाने पर स्थिर पूंजी निवेश का 30 प्रतिशत और ए कैटेगरी के जिलों में 25 प्रतिशत पूंजी सब्सिडी मिलेगी. इसके तहत सूक्ष्म उद्यमों को अधिकतम 25 लाख रुपये, लघु उद्यमों को अधिकतम 1.5 करोड़ रुपये और मध्यम उद्यमों को अधिकतम 5 करोड़ रुपये तक की पूंजी सब्सिडी दी जायेगी.

महिला और ट्रांसजेंडरों के लिए के लिए भी प्रस्ताव

महिला, एससी, एसटी, बीसी, दिव्यांग और ट्रांसजेंडर उद्यमियों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त पूंजी सब्सिडी देने का प्रस्ताव है. नई यूनिट्स को पहले तीन सालों तक कर्मचारियों के ईपीएफ में नियोक्ता अंशदान की प्रतिपूर्ति की जायेगी. इसके अलावा तीन साल तक बिजली शुल्क पर 20 प्रतिशत सब्सिडी, रूफटॉप सोलर प्लांट पर 25 प्रतिशत (अधिकतम पांच लाख रुपये), ऊर्जा एवं जल ऑडिट पर 75 प्रतिशत (अधिकतम 1 लाख रुपये) और स्टाम्प ड्यूटी की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति का प्रावधान किया गया है.

नीति में राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन के लिए अधिकतम दो लाख रुपये, अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन के लिए 10 लाख रुपये, पेटेंट रजिस्ट्रेशन पर 75 प्रतिशत (अधिकतम 3 लाख रुपये), ट्रेडमार्क और जीआई पंजीकरण पर 50 प्रतिशत (अधिकतम 25 हजार रुपये) और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अपनाने पर 75 प्रतिशत (अधिकतम एक लाख रुपये) तक की सहायता का भी प्रस्ताव है.

इतने दिनों में देना है सुझाव

उद्योग विभाग ने इस नई नीति पर सभी स्टेकहोल्डर्स से सुझाव आमंत्रित किए हैं. इच्छुक व्यक्ति ड्राफ्ट जारी होने के 15 कार्य दिवस के अंदर ई-मेल से अपने सुझाव भेज सकते हैं. सुझावों के आधार पर नीति को अंतिम रूप दिया जाएगा.

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Published by: Preeti Dayal

डिजिटल जर्नलिज्म में 3 साल का अनुभव. डिजिटल मीडिया से जुड़े टूल्स और टेकनिक को सीखने की लगन है. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं. बिहार की राजनीति और देश-दुनिया की घटनाओं में रुचि रखती हूं.
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