IAS Yogesh Sagar And Abhilasha Sharma: टेंडर घोटाला मामले में विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने रिशु श्री से पूछताछ में मिले इनपुट के आधार पर IAS योगेश कुमार सागर, IAS अभिलाषा शर्मा और मातृसवा इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक पवन कुमार के ठिकानों पर छापेमारी कर रही है. अलग-अलग ठिकानों पर टीम छापेमारी कर रही है. दोनों IAS अधिकारियों पर आरोप है कि रिशु श्री की कंपनियों को टेंडर देने में काफी मदद की. रिशु श्री पिछले तीन दिनों से रिमांड पर हैं. जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर टीम दस्तावेज खंगाल रही है.
दोनों अधिकारियों का नाम एक कथित टेंडर और वित्तीय अनियमितता मामले में सामने आने के बाद सुर्खियों में आया.
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IAS योगेश कुमार सागर का प्रोफाइल
योगेश कुमार सागर बिहार कैडर के 2017 बैच के अधिकारी हैं. प्रशासनिक हलकों में उन्हें तेज-तर्रार और तकनीक आधारित कार्यशैली के लिए जाना जाता रहा है.
योगेश कुमार सागर की प्रमुख पोस्टिंग
- फोर्ब्सगंज (अररिया) में SDO
- भागलपुर नगर निगम में नगर आयुक्त
- बिहार अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (BUIDCO) के MD
- समाज कल्याण विभाग में निदेशक
BUIDCO में कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई शहरी विकास परियोजनाओं की निगरानी की थी. इसी दौरान कई बड़े टेंडर और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स भी स्वीकृत हुए.
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IAS अभिलाषा कुमारी शर्मा का प्रोफाइल
अभिलाषा कुमारी शर्मा बिहार कैडर की 2014 बैच की अधिकारी हैं. वे राज्य की चर्चित महिला अधिकारियों में गिनी जाती रही हैं.
अभिलाषा शर्मा की प्रमुख पोस्टिंग
- केंद्रीय गृह मंत्रालय में प्रारंभिक नियुक्ति
- सीतामढ़ी की जिलाधिकारी (DM)
- वित्त विभाग में संयुक्त सचिव
- जीविका (JEEViKA) परियोजना में वरिष्ठ प्रशासनिक जिम्मेदारी
- ग्रामीण विकास विभाग से जुड़ी विभिन्न जिम्मेदारियां
अभिलाषा शर्मा को प्रशासनिक दक्षता और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए जाना जाता रहा है.
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विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
पूरे मामले के केंद्र में एक कारोबारी और ठेकेदार रिशु श्री का नाम सामने आया है. जांच एजेंसियों को कुछ सरकारी टेंडरों और वित्तीय लेन-देन में कथित अनियमितताओं की जानकारी मिली.
जांच के दौरान यह आरोप सामने आया कि कुछ सरकारी परियोजनाओं में नियमों के विपरीत लाभ पहुंचाने और वित्तीय गड़बड़ियों की आशंका है. इसी आधार पर बिहार की विशेष निगरानी इकाई (SVU) और बाद में ED ने मामले में दिलचस्पी दिखाई. हालांकि, अभी तक किसी अदालत ने इन आरोपों को साबित नहीं किया है.
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घटनाक्रम की टाइमलाइन
2024-25
- निगरानी एजेंसियों को कुछ टेंडर प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं की शिकायतें मिलीं.
- SVU ने प्रारंभिक जांच शुरू की.
नवंबर 2025
- ED ने बिहार सरकार और SVU से दोनों अधिकारियों से जुड़े दस्तावेज और सूचनाएं मांगीं.
- मनी लॉन्ड्रिंग एंगल की जांच शुरू हुई.
2025 के अंत में
- कई परिसरों पर छापेमारी और दस्तावेजों की जांच हुई.
- बैंकिंग और संपत्ति संबंधी लेन-देन की जांच तेज हुई.
मई 2026
- बिहार सरकार ने दोनों IAS अधिकारियों को निलंबित कर दिया.
- निलंबन के बाद विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई.
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