hajipur news. रजिस्ट्री में हो रही देरी से गुस्साये ग्रामीणों ने उत्क्रमित मवि भटौलिया में की तालाबंदी

पिछले साल भी मई में भी ग्रामीणों ने की थी तालाबंदी, दो दिनों में एनओसी मिलने के आश्वासन पर खुला था ताला

गोरौल. प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय भटौलिया में शुक्रवार को ग्रामीणों ने तालाबंदी कर दी. ग्रामीणों ने सभी शिक्षकों को विद्यालय से बाहर निकाल दिया और विद्यालय के गेट पर ताला लगा दिया. लोगों को समझाने आए बीइओ को ग्रामीणों ने खदेड़ दिया. जानकारी के अनुसार, इससे पहले भी पिछले साल 21 मई को ग्रामीणों ने विद्यालय में तालाबंदी कर दी थी. सैकड़ों की संख्या में जुटे ग्रामीणों का कहना है कि लगभग 65 वर्ष पहले पूर्व मुखिया रामचन्द्र साह ने विद्यालय के लिए 41 डिसमिल जमीन दान की थी. उसी जमीन पर विद्यालय का निर्माण कर पढ़ाई शुरू की गई थी, लेकिन उस समय सरकार द्वारा जमीन की रजिस्ट्री नहीं कराई गई और विद्यालय चलता रहा. विद्यालय में एक नवसृजित प्राथमिक विद्यालय को भी टैग कर दिया गया है. दोनों विद्यालयों में लगभग 400 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं, जिनमें से लगभग 300 छात्र-छात्राएं प्रतिदिन उपस्थित रहते हैं. इतने बच्चों के बैठने के लिए कक्षों की कमी हुई, और भवन निर्माण के लिए फंड भी आया. निर्माण कार्य शुरू किया गया तो पता चला कि विद्यालय के नाम से जमीन ही नहीं है.

इस मामले में रामचंद्र साह के पुत्र ओम प्रकाश साह, पौत्र प्रशांत कुमार सहित अन्य वंशज अभी भी जमीन रजिस्ट्री करने के लिए तैयार हैं. इसे लेकर 20 अक्टूबर 2024 को एक हजार रुपये के स्टाम्प पर डीएम को लिखित रूप में जानकारी दी गई थी. उन्होंने कहा कि आप विद्यालय के नाम से जमीन रजिस्ट्री करा दें और निबंधन शुल्क माफ कर दें. इसके बाद डीएम के आदेश के आलोक में जिला शिक्षा पदाधिकारी ने सीओ से जमीन की एनओसी मांगने के निर्देश दिए. कई महीने बीत जाने के बाद भी तत्कालीन सीओ अंशु कुमार** ने एनओसी नहीं दी, जिसके कारण ग्रामीण भड़क गए और 21 मई को विद्यालय में तालाबंदी कर सीओ के विरुद्ध नारेबाजी की.

तत्कालीन सीओ पर पांच लाख रुपये मांगने का आरोप

ग्रामीणों का आरोप था कि सीओ ने एनओसी के लिए पांच लाख रुपये की मांग की और कुछ रुपया भी दिया गया, लेकिन आज तक एनओसी नहीं मिली. ग्रामीणों का कहना है कि या तो सरकार जमीन रजिस्ट्री कराकर विद्यालय को सभी सुविधाएं उपलब्ध कराये या जमीन खाली कराए. सीओ के अड़ियल रवैये के कारण बच्चे खुले आकाश के नीचे पढ़ने को विवश हैं.

तत्कालीन बीडीओ उदय कुमार और अन्य अधिकारी विद्यालय पहुंचे और दो दिनों के अंदर एनओसी दिलाने का आश्वासन ग्रामीणों को दिया. इसके बाद ताला खोला गया. लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई और जमीन का निबंधन नहीं कराया गया. बच्चे आज भी खुले आसमान के नीचे पढ़ रहे हैं, जिससे ग्रामीण एक बार फिर भड़क गए और शिक्षकों को बाहर निकालकर ताला लगा दिया.

प्रधानाध्यापक के अनुरोध पर भी नहीं खोला ताला

ग्रामीणों का कहना है कि जब तक जमीन की रजिस्ट्री सरकार नहीं कराती, बच्चे विद्यालय नहीं जाएंगे. प्रधानाध्यापक अशोक कुमार ने बताया कि ग्रामीणों ने तालाबंदी कर दी है. हमलोग विद्यालय खोलने का अनुरोध करते रहे, लेकिन ग्रामीणों ने कहा कि जमीन खाली करें या किराया दें, तब ही प्रवेश मिलेगा. इसकी सूचना विभाग के अधिकारियों को दे दी गई है. नगर पंचायत की कार्यपालक पदाधिकारी अर्चना कुमारी मौके पर पहुंची और बताया कि पूरी फाइल बीइओ के पास है, इससे अधिक जानकारी उनके पास नहीं है.

सीओ के छुट्टी पर रहने से विलंब

प्रखंड विकास पदाधिकारी पंकज कुमार निगम ने बताया कि जमीन का निबंधन करने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है. रजिस्ट्री ग्रहण बीइओ को करना है और उन्हें इसके लिए निदेशित किया गया है कि संबंधित कार्यालय से समन्वय कर रजिस्ट्री करा लें. बीइओ सुनील कुमार ने बताया कि रजिस्ट्री ग्रहण की प्रक्रिया लगभग पूरी है. अंचल कार्यालय से कुछ प्रक्रिया बाकी रह गई है, जिसे पूरा करते ही रजिस्ट्री हो जायेगी. सीओ छुट्टी पर हैं, इसलिए विलंब हो रहा है.

दान की हुई जमीन की रजिस्ट्री प्रक्रिया

जानकारों के अनुसार, जमीन दान में देने के लिए डीएम के पास लिखित आवेदन देना होता है. डीएम से मामला राजस्व विभाग को भेजा जाता है. अभिलेखों का सत्यापन किया जाता है और उसके बाद जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया होती है. इस प्रक्रिया में ड्यूटी सरकार देती है और जमीन निशुल्क रजिस्ट्री होती है.

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