वैशाली: गंगा का जलस्तर स्थिर, फिर भी राघोपुर दियारा में बाढ़ का कहर बरकरार, 37 स्कूल बंद

राघोपुर में गंगा का जलस्तर स्थिर होने के बावजूद बाढ़ का कहर जारी है। दर्जनों गांव जलमग्न, 37 स्कूल बंद और आवागमन पूरी तरह ठप, लोग नाव के सहारे गुजर-बसर कर रहे हैं।

Hajipur News : राघोपुर. पिछले दो दिनों से गंगा के जलस्तर में स्थिरता बनी हुई है, लेकिन राघोपुर दियारा के बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्थिति में खास सुधार नहीं हुआ है. कुछ स्थानों पर पानी घटा है, लेकिन अधिकांश निचले इलाकों में अब भी बाढ़ का पानी फैला हुआ है. चकसिंगार, वीरपुर, जुड़ावनपुर बरारी, जुड़ावनपुर करारी, फतेहपुर, रामपुर, जफराबाद, जहांगीरपुर और शिवनगर समेत दर्जनों गांव बाढ़ की चपेट में हैं. जुड़ावनपुर थाना परिसर में भी पानी प्रवेश कर गया है, जबकि मोबाइल टावर का निचला हिस्सा डूब चुका है. जुड़ावनपुर बरारी स्थित बिंदा चौक तक भी पानी पहुंच गया है.

मुख्य सड़कों पर दो से तीन फीट पानी, नाव से आवागमन

सिक्स लेन पुल से जहांगीरपुर-जफराबाद जाने वाली सड़क पर दो से तीन फीट पानी बह रहा है. जुड़ावनपुर से चकसिंगार, रुस्तमपुर से वीरपुर और शिवनगर बिंदा मार्केट से विश्राम टोला जाने वाली सड़कें भी पूरी तरह जलमग्न हैं. पानी की अधिकता के कारण इन मार्गों पर आवागमन लगभग ठप है और ग्रामीण नाव के सहारे आने-जाने को मजबूर हैं. प्रशासन की ओर से नावों का परिचालन कराया जा रहा है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि नावों की संख्या पर्याप्त नहीं है.

जफराबाद और जहांगीरपुर के लोगों की बढ़ी परेशानी

बाढ़ के कारण जफराबाद और जहांगीरपुर पंचायत के लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है. ग्रामीणों को कई किलोमीटर तक कमर भर पानी में चलकर आना-जाना पड़ रहा है. लोग हाथ में चप्पल, सिर पर गमछा और कपड़े लेकर पानी में चलने को मजबूर हैं. कुछ लोग ट्रैक्टर की ट्रॉली से भी सफर कर रहे हैं.

ग्रामीणों के अनुसार सिक्स लेन पुल का निर्माण कर रही एलएंडटी कंपनी द्वारा बनाये गये अस्थायी रास्ते से ही आवागमन हो रहा है. उनका कहना है कि बाढ़ के दौरान आपात स्थिति में कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं होने से बीमार लोगों को अस्पताल ले जाने में भी परेशानी होती है. ग्रामीणों ने बिहार सरकार और जिला प्रशासन से सिक्स लेन पुल के पाया नंबर 26 से जफराबाद पेठिया तक ऊंची सड़क बनाने की मांग की है.

चारे का संकट, 37 स्कूलों में पढ़ाई बंद

खेतों में बाढ़ का पानी भर जाने से हरा चारा डूब गया है. इससे पशुपालकों के सामने मवेशियों के लिए चारे का संकट खड़ा हो गया है. ग्रामीणों का कहना है कि जल्द पानी नहीं निकला तो परेशानी और बढ़ेगी.

बाढ़ का असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ा है. राघोपुर प्रखंड के 37 विद्यालयों में पानी घुसने के कारण पढ़ाई बंद कर दी गयी है.

अधिकारियों ने नाव से लिया बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा

गुरुवार दोपहर राघोपुर के अंचल अधिकारी राजीव रंजन चौधरी और जुड़ावनपुर थानाध्यक्ष अभिषेक कुमार ओझा पुलिस बल के साथ नाव से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के निरीक्षण पर निकले. टीम ने चकसिंगार पंचायत के लंका, रामपुर, जुड़ावनपुर बरारी पंचायत के विश्राम, शिवनगर, वीरपुर, तेरसिया, जफराबाद और राघोपुर पूर्वी पंचायत के जलमग्न गांवों का जायजा लिया.

अधिकारियों ने गांव-गांव जाकर बाढ़ पीड़ितों से उनकी समस्याएं सुनीं. ग्रामीणों ने पीने के पानी, बिजली, पशु चारा और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी समस्याएं बतायीं. कई घरों में अब भी पानी घुसा हुआ है. अंचल अधिकारी ने ग्रामीणों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया और समस्याओं की जानकारी जिला प्रशासन को देने की बात कही.

पशु राहत शिविर में 82 पशुओं का इलाज

बाढ़ प्रभावित चकसिंगार पंचायत में गुरुवार को एक दिवसीय बाढ़ राहत पशु शिविर लगाया गया. शिविर का नेतृत्व प्रखंड पशु चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. आशीष रंजन ने किया. बाढ़ के पानी में घिरे रहने से बीमार हुए पशुओं की जांच कर उनका इलाज किया गया.

डॉ. आशीष रंजन ने बताया कि बाढ़ के दौरान पशुओं में गलघोंटू, खुरपका-मुंहपका, दस्त, अफरा और चर्म रोग का खतरा बढ़ जाता है. शिविर में गाय, भैंस, बकरी और बछड़े समेत 82 पशुओं का इलाज किया गया. वहीं 22 पशुपालकों के बीच नि:शुल्क दवाओं का वितरण किया गया.

छह सरकारी और 46 निजी नावों का संचालन

प्रशासन के अनुसार प्रभावित इलाकों में सुरक्षित आवागमन के लिए छह सरकारी और 46 निजी नावों का संचालन कराया जा रहा है. प्रभावित परिवारों के बीच अब तक 270 पॉलिथीन शीट का वितरण किया गया है. मानव और पशु स्वास्थ्य की देखभाल के लिए जरूरत के अनुसार हेल्थ कैंप भी लगाये जा रहे हैं, जहां चिकित्सा सुविधा और दवाएं उपलब्ध करायी जा रही हैं.


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By अभिषेक शाश्वत

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