Hajipur News : राघोपुर में सरस्वती विद्या निकेतन, बीएसजेएस-2, राघोपुर में सोमवार को प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग (पीबीएल) एवं पियर लर्निंग विषय पर एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला में निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों, मूलभूत साक्षरता एवं संख्या ज्ञान तथा बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण बनाने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई.
समूह में सीखने और विचार साझा करने पर जोर
कार्यशाला में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि पियर लर्निंग के माध्यम से प्रोजेक्ट आधारित अधिगम को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है. शिक्षकों ने विद्यार्थियों को समूह में कार्य करने, एक-दूसरे से सीखने, विचार साझा करने, समस्याओं के समाधान खोजने तथा अनुभवों के आधार पर सीखने के अवसर उपलब्ध कराने की रणनीतियों पर चर्चा की. प्रतिभागियों ने कक्षा-कक्ष में पीबीएल और पियर लर्निंग के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक गतिविधियों एवं कार्ययोजनाओं को भी साझा किया.
केवल प्रोजेक्ट तैयार करना शिक्षा का उद्देश्य नहीं
कार्यशाला के दौरान वर्ष 2027 में प्रस्तावित परख सर्वेक्षण में राघोपुर के विद्यार्थियों के बेहतर प्रदर्शन के लिए शिक्षकों ने सामूहिक रूप से प्रतिबद्धता जताई. शिक्षकों ने बच्चों में पाठ्यवस्तु की समझ के साथ तर्कशक्ति, समस्या समाधान, संचार, सहयोग एवं रचनात्मकता जैसे कौशल विकसित करने पर विशेष ध्यान देने की बात कही.
सभा को संबोधित करते हुए जिला तकनीकी टीम से कुंदन चौबे ने कहा कि तथ्यों को याद कर लेना या किसी विषय पर केवल एक प्रोजेक्ट तैयार कर देना ही शिक्षा का उद्देश्य नहीं है. प्रोजेक्ट आधारित अधिगम की वास्तविक सफलता इस बात में है कि पूरी प्रक्रिया के दौरान बच्चों में कौन-कौन से कौशल विकसित हुए और उन्होंने अपने अनुभवों, प्रयोगों, प्रश्नों तथा समस्याओं के समाधान के माध्यम से क्या सीखा.
अनुभव और प्रयोग से सीखना अधिक प्रभावी
कुंदन चौबे ने कहा कि जब विद्यार्थी स्वयं खोज करते हैं, साथियों के साथ विचार-विमर्श करते हैं, गलतियों से सीखते हैं और सीखी हुई बातों को वास्तविक जीवन की परिस्थितियों से जोड़ते हैं, तभी अधिगम अधिक स्थायी और सार्थक बनता है.
शिक्षकों ने साझा किए अनुभव
कार्यक्रम में जिला दल के प्रतिनिधि के रूप में फाउंडेशन के चंद्र प्रताप मौर्य उपस्थित रहे. कार्यशाला में विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षित शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा किए तथा पीबीएल और पियर लर्निंग के प्रभावी संचालन के लिए अपनाई जा रही गतिविधियों एवं नवाचारों पर चर्चा की. कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को नई शिक्षण पद्धतियों से परिचित कराने के साथ उन्हें कक्षा-कक्ष में प्रभावी रूप से लागू करने के लिए प्रेरित करना रहा, ताकि बच्चों में विषयगत समझ के साथ 21वीं सदी के आवश्यक कौशलों का भी विकास हो सके.
