Hajipur News(गोपाल कुमार): वैशाली जिले के सदर प्रखंड अंतर्गत चांदी धनुषी पंचायत में मंगलवार को सरकार द्वारा आयोजित सहयोग शिविर के दौरान भारी बवाल देखने को मिला. शिविर का निरीक्षण करने पहुंचे जिला पदाधिकारी (DM), पुलिस अधीक्षक (SP) और स्थानीय विधायक के सामने ही दलित टोला के ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया और जमकर हंगामा किया. आक्रोश इस कदर था कि कुछ ग्रामीण तपती धूप में सीधे डीएम की गाड़ी के आगे सड़क पर लेट गए. इस पूरे हंगामे और अधिकारियों व जनप्रतिनिधि से उलझते लोगों का वीडियो सोशल मीडिया पर बड़ी तेजी से वायरल हो रहा है.
क्या है पूरा मामला? क्यों भड़का ग्रामीणों का आक्रोश
जिले की विभिन्न पंचायतों में जनसमस्याओं के निवारण के लिए मंगलवार को सहयोग शिविरों का आयोजन किया गया था. चांदी धनुषी पंचायत भवन परिसर में आयोजित शिविर का निरीक्षण करने हाजीपुर के विधायक अवधेश सिंह, डीएम वर्षा सिंह और एसपी विक्रम सिहाग पहुंचे थे. शिविर का विधिवत उद्घाटन करने के बाद जब डीएम और एसपी वापस लौटने लगे, तभी पास के दलित टोला के सैकड़ों ग्रामीण वहां जुट गए. ग्रामीणों ने डीएम से शिकायत की कि आजादी के सात दशक बाद भी उनके टोले में आने-जाने के लिए कोई सड़क नहीं है. उन्होंने डीएम से खुद चलकर स्थल निरीक्षण करने की गुहार लगाई, जिस पर डीएम वर्षा सिंह टोले की ओर जाने के लिए पैदल ही निकल पड़ीं.
विधायक पर रोकने का आरोप, भड़क उठे ग्रामीण
ग्रामीणों का आरोप है कि डीएम जब दलित टोले की ओर बढ़ रही थीं, तभी स्थानीय विधायक अवधेश सिंह ने जिला पदाधिकारी को बीच रास्ते में ही रोक दिया और कहा कि यहीं से रास्ता देख लीजिए, समस्या का समाधान हो जाएगा.
विधायक की इस बात के बाद जब अधिकारी बिना टोले में गए ही वापस अपनी गाड़ियों की तरफ लौटने लगे, तो ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया. खुद को उपेक्षित पाकर ग्रामीण उग्र हो गए और उन्होंने विधायक अवधेश सिंह के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी. देखते ही देखते कुछ लोग पदाधिकारियों की गाड़ियों के सामने कड़कड़ाती धूप में लेट गए, जिससे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया.
DM-SP का आश्वासन भी पड़ा फीका, बड़ी मशक्कत के बाद निकले अधिकारी
सड़क पर ग्रामीणों को लेटा देख और स्थिति बिगड़ती भांप डीएम वर्षा सिंह और एसपी विक्रम सिहाग तुरंत अपनी गाड़ियों से नीचे उतरे और लोगों के बीच पहुंचे. डीएम वर्षा सिंह ने आक्रोशित ग्रामीणों को काफी समझाने का प्रयास किया और आश्वासन दिया कि दलित टोले में जाने वाली सड़क के निर्माण के लिए प्रशासनिक स्तर पर त्वरित पहल की जाएगी. हालांकि, डीएम और एसपी के इस आश्वासन के बाद भी ग्रामीणों का गुस्सा पूरी तरह शांत नहीं हुआ और विधायक के प्रति उनका विरोध जारी रहा. माहौल बिगड़ता देख डीएम, एसपी और विधायक किसी तरह लोगों को समझा-बुझाकर वहां से निकल पाए. बाद में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मध्यस्थता के बाद ग्रामीण पूरी तरह शांत हुए.
“आजादी के 70 साल बाद भी पैदल चलने को मजबूर हैं हम”
हंगामा कर रहे दलित टोले के निवासियों ने व्यवस्था और स्थानीय जनप्रतिनिधि के प्रति अपना गहरा दर्द बयां किया. ग्रामीणों ने बताया कि सड़क न होने के कारण आपातकालीन स्थिति (जैसे बीमारी) में एम्बुलेंस या अन्य गाड़ियां टोले तक नहीं आ पाती हैं. घर में किसी लड़के या लड़की की शादी होने पर भी मेहमानों और दूल्हा-दुल्हन को मुख्य सड़क पर गाड़ी छोड़कर टोले तक पैदल ही आना पड़ता है. रास्ता न होने के कारण अब लोग यहाँ लड़कों की शादी करने से भी कतराने लगे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण को लेकर उन्होंने कई बार स्थानीय विधायक अवधेश सिंह से लिखित और मौखिक शिकायत की, लेकिन आज तक उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है. आज जब जिले के आला अधिकारी खुद रास्ता देखने आ रहे थे, तब भी विधायक ने उन्हें रोक दिया, जिसे ग्रामीण बर्दाश्त नहीं कर सके.
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