वैशाली: बाढ़ ने छीना आशियाना, मवेशियों को बचाने में गुजरी भयावह रात, शिविर में मिली राहत

राघोपुर दियारा में बाढ़ से बेघर हुए लोगों ने सुनाई अपनी आपबीती। महनार के राहत शिविर में रह रहे विस्थापितों ने बयां किया घर और मवेशियों को खोने का दर्द।

Floods in Vaishali : महनार में जब बाढ़ का पानी घर की चौखट पार कर छप्पर तक पहुंच जाए, जब जिंदगी बचाने के लिए वर्षों की कमाई और अपना आशियाना पीछे छोड़ना पड़े और पेट भरने के लिए घर में एक दाना भी न बचे, तो इंसान के पास आंसुओं के सिवा शायद ही कुछ बचता है. राघोपुर दियारा में आयी बाढ़ ने शिवनगर लंका टोला, चकचान और चकसिंगार गांव के लोगों को ऐसी ही त्रासदी से रूबरू कराया है. महनार के चमरहरा स्थित जगदीश उच्च विद्यालय में बनाये गये आश्रय स्थल सह बाढ़ राहत शिविर में रह रहे विस्थापितों की आंखों में आज भी उस भयावह रात का मंजर ताजा है.

नाव के सहारे बचायी जान, साथ नहीं छोड़ा

शिवनगर लंका टोला, चकचान और चकसिंगार गांव के अधिकांश लोग बाढ़ के कारण अपना घर छोड़कर शिविर में पहुंचे हैं. किसी ने नाव पर बैठकर जान बचायी, तो किसी ने बच्चों और मवेशियों को लेकर सुरक्षित स्थान की तलाश में पूरी रात गुजार दी. घर छोड़ने का दर्द हर चेहरे पर साफ नजर आ रहा था. सबसे बड़ी चिंता उन पशुपालकों की थी, जिनके लिए मवेशी परिवार के सदस्यों से कम नहीं हैं.

2016 के बाद पहली बार देखा इतना पानी

शिवनगर लंका टोला निवासी दहाउर राय बाढ़ की कहानी बताते-बताते उस भयावह रात को याद करने लगे. उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 के बाद पहली बार इतना भयंकर पानी देखा है. पानी उनके घर के छप्पर तक पहुंच गया था. हालात इतने खराब हो गये कि रात में ही नाव का सहारा लेना पड़ा. वह अपने आठ मवेशियों को साथ लेकर नाव से महनार घाट पहुंचे.

दहाउर राय की कहानी सिर्फ उनके परिवार की नहीं है. यह उन तमाम पशुपालकों की पीड़ा है, जिनके लिए मवेशी परिवार का हिस्सा हैं. घर डूब रहा था, लेकिन मवेशियों को छोड़कर निकलना भी उनके लिए संभव नहीं था.

बाढ़ की कहानी बताते-बताते रो पड़ीं अनिता देवी

शिवनगर निवासी अनिता देवी बाढ़ का हाल बताते-बताते अचानक रो पड़ीं. आंखों से आंसू निकलते रहे और शब्द गले में अटक गये. उन्होंने कहा कि किसी तरह घर-बार छोड़कर महनार घाट पहुंचीं. पीछे घर, सामान और वर्षों में बनायी गयी जिंदगी छूट गयी. उनकी आंखों के आंसू बाढ़ से हुई तबाही की पूरी कहानी बयां कर रहे थे.

मवेशियों को सुरक्षित निकालना सबसे बड़ी चुनौती

शिवनगर लंका टोला निवासी देवनारायण राय ने बताया कि बाढ़ में सबसे खराब स्थिति मवेशियों की थी. इंसान तो किसी तरह नाव पर बैठकर सुरक्षित निकल आया, लेकिन मवेशियों को साथ निकालना सबसे बड़ी चुनौती थी. किसी तरह मवेशियों के साथ महनार बाजार घाट पहुंचे. उन्होंने कहा कि घर में कुछ नहीं बचा है और परिवार दाना-दाना के लिए परेशान है.

डीएम को फोन किया

बाढ़ पीड़ितों ने बताया कि महनार बाजार घाट पहुंचने के बाद उन्होंने वैशाली की जिलाधिकारी वर्षा सिंह को मोबाइल पर सूचना दी. सूचना मिलते ही जिलाधिकारी स्वयं महनार घाट पहुंचीं और मौके पर मौजूद अधिकारियों को तत्काल राहत शिविर शुरू करने का निर्देश दिया. इसके बाद बाढ़पीड़ितों को महनार के चमरहरा स्थित जगदीश उच्च विद्यालय में बनाये गये आश्रय स्थल सह बाढ़ राहत शिविर में लाया गया.

घर से बेहतर मिली शिविर की व्यवस्था

बाढ़ की त्रासदी झेलकर राहत शिविर पहुंचे लोगों ने वहां की व्यवस्था देखकर राहत महसूस की. पीड़ितों के अनुसार, जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला प्रशासन और महनार अनुमंडल प्रशासन की ओर से दो समय शुद्ध भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है. बीमार लोगों के लिए भोजन में रोटी की व्यवस्था की गयी है. दुधमुंहे बच्चों को दूध और बिस्कुट दिया जा रहा है.

बाढ़ में अपना घर गंवाने के बाद भी राहत शिविर में बच्चों के हाथों में किताबें नजर आ रही हैं. यह तस्वीर उम्मीद जगाती है कि पानी भले ही घरों तक पहुंच गया हो, लेकिन इन परिवारों की जिंदगी और उनके भविष्य को पूरी तरह डुबो नहीं पाया है.

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By Prabhat khabar news desk

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