hajipur news. शहर के एकमात्र आउटडोर स्टेडियम बना वाहन पार्किंग स्थल

एथलेटिक्टस, क्रिकेट, कबड्डी जैसे आउटडोर खेल के लिए कोई ढंग का स्टेडियम शहर में नहीं है

हाजीपुर. कोई भी खिलाड़ी अपने साहस, प्रतिभा और मेहनत के बल पर पहले जिला फिर राज्यस्तरीय, राष्ट्रीयस्तरीय और फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाता है. लेकिन ये साहस और मेहनत तब असफल होती दिखती है, जब खेल मैदान के अभाव में इन खिलाड़ियों के सपने बिखरने लगते हैं. हालांकि, कई खिलाड़ी इसी के बावजूद राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं.

इंडोर स्टेडियम के केवल दो ही बैडमिंटन कोर्ट

शहर में बसावन सिंह इंडोर स्टेडियम में दो बैंडमिंटन कोर्ट ही है, जहां खिलाड़ी और बच्चे पसीना बहाने हर दिन जुटते हैं. लेकिन शहर का एक मात्र आउटडोर स्टेडियम वाहन पार्किंग का रूप ले लिया है. स्थानीय कुशवाहा आश्रम में सिमेंटेड फर्श पर बाल बैडमिंटन खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशेष पहचान बनायी है. यहां की खिलाड़ी प्रिया सिंह ने राष्ट्रीय स्तर एवं अंतर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है. इन जैसी कई खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया है. लेकिन बात केवल बाल बैडमिंटन की नहीं है. एथलेटिक्टस, क्रिकेट, कबड्डी जैसे आउटडोर खेल के लिए कोई ढंग का स्टेडियम शहर में नहीं है. साल दर साल बीतने के बावजूद यहां के खिलाड़ियों को ढंग का एक स्टेडियम भी नहीं मिल सका.

दावों और वादों के बीच खिलाड़ी अपने स्तर पर छोटी- छोटी जगहों पर खेल का अभ्यास करते हैं और वहीं अपना पसीना बहाते हैं. इन खिलाड़ियों को अपनी मेहनत पर पानी फिरता दिखता है, जब शहर के बीचों बीच स्थित अक्षयवट राय स्टेडियम को भी प्रशासन ने वाहन पड़ाव में तब्दील हो गया. इस स्टेडियम में हर सुबह कुछ युवा बैट-बाॅल लेकर इस स्टेडियम को स्टेडियम होने का आभास दिलाते हैं. लेकिन जैसे ही सुबह के साढ़े नौ बजता है, हर दिन की तरह वाहनों का प्रवेश इस स्टेडियम में होने लगता है. रजिस्ट्री कार्यालय में भी आने वाले लोग अपने वाहन इसी स्टेडियम में लगाते हैं. बारिश के दौरान इस स्टेडियम की स्थिति और खस्ता हो जाती है.

खलता है स्टेडियम का अभाव

कुशवाहा आश्रम में अपने खिलाड़ियों को अभ्यास कराने वाले जिला बाल बैडमिंटन संघ के सचिव रविरंजन बताते हैं कि स्टेडियम के अभाव में कुशवाहा आश्रम की खाली जगह में बाल बैडमिंटन, खो-खो एवं कबड्डी आदि का अभ्यास किया जाता है. जिससे कई बार खिलाड़ियों को चोट भी लग जाती है. स्टेडियम का अभाव बहुत खलता है. वहीं क्रिकेट खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे रहे कोच और संघ के सचिव प्रकाश सिंह ने बताया कि खेल मैदान और स्टेडियम के अभाव में खिलाड़ी सोनपुर या दूसरे स्थान पर खेलने जाते हैं. इसके साथ ही कोई प्रतियोगिता कराने के लिए भी दूसरी जगह का मुंह देखना पड़ता है.

खिलाड़ी बताते हैं कि विभिन्न खेलों में कई खिलाडियों द्वारा शानदार प्रदर्शन के बावजूद स्थानीय स्तर पर खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने का विशेष कार्य नहीं हुआ. संसाधन उपलब्ध कराना तो दूर की बात है, खाली स्टेडियम भी अब खेलने लायक नहीं रहा. अंतर राष्ट्रीय खिलाड़ी प्रिया सिंह बताती हैं कि कई राज्यों एवं श्रीलंका तक प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए गई, वहां अपने खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए हर वर्ग के लोग आगे रहते हैं. लेकिन यहां का दुर्भाग्य है कि खिलाड़ी यहां स्टेडियम और खेल मैदान के लिए तरसते हैं. खिलाड़ी कविता और वंदना सिंह ने भी कुछ ऐसी ही बातें की.

अब ऐसे में हाजीपुर सियासी लड़ाई देख रहा है. इसके बीच खिलाड़ी भी एक नई आस के साथ प्रत्याशियों एवं दलों के दावों को अपने आवश्यकता के तराजू पर तौल रहे हैं. देखना दिलचस्प होगा कि इस चुनावी महासमर को जीतने वाला प्रत्याशी क्या इन खिलाड़ियों की दशक से बहुप्रतिक्षित आवश्यकताओं को पूरा करने का प्रयास करते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >