hajipur news. मौलाना आजाद का जीवन भाषायी विविधता को सम्मान देने की देता है प्रेरणा : प्राचार्य

दिग्घी स्थित देवचन्द महाविद्यालय के उर्दू विभाग की ओर से मौलाना अबुल कलाम आजाद की 137वीं जयंती पर संगोष्ठी की गयी

हाजीपुर.

दिग्घी स्थित देवचन्द महाविद्यालय के उर्दू विभाग की ओर से मौलाना अबुल कलाम आजाद की 137वीं जयंती, राष्ट्रीय शिक्षा दिवस तथा विश्व उर्दू दिवस की पूर्व संध्या पर एक संगोष्ठी की गयी. कार्यक्रम का उद्देश्य मौलाना आजाद के योगदान को स्मरण करते हुए शिक्षा एवं उर्दू भाषा के महत्व पर विचार-विमर्श करना था. कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ अनिल कुमार एवं अतिथियों ने दीप जलाकर व आजाद के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया.

हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ आलोक कुमार सिंह ने विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि मौलाना आजाद ने शिक्षा को धर्म, जाति और भाषा से ऊपर उठाकर राष्ट्र निर्माण का माध्यम बनाया. उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ मो सुल्तान अकबर खान ने कहा कि उर्दू भाषा सिर्फ एक जुबान नहीं, बल्कि संस्कृति और मोहब्बत की पहचान है. मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में कहा कि मौलाना आजाद ने शिक्षा को समाज की प्रगति का आधार माना और उर्दू को राष्ट्रीय एकता की भाषा है. प्राचार्य डॉ अनिल कुमार ने कहा कि मौलाना आजाद भारतीय शिक्षा नीति के निर्माता थे और उनका जीवन हमें शिक्षा के मूल्य एवं भाषाई विविधता को सम्मान देने की प्रेरणा देता है.

कार्यक्रम का संचालन राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ सत्यप्रकाश कुमार ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन अर्थशास्त्र विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ आतिफ रब्बानी ने दिया. इस अवसर पर महाविद्यालय के सभी शिक्षक, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे.

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Author: KAIF AHMED

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