Gopalganj News: जिले के यूपी सीमा से सटे पंचदेवरी, कटेया, कुचायकोट, विजयीपुर और भोरे प्रखंडों में शराब माफियाओं का नेटवर्क लगातार फैलता जा रहा है. सीमावर्ती इलाकों में लगभग हर दिन कहीं न कहीं शराब की खेप पकड़ी जा रही है. पुलिस की ओर से कार्रवाई भी की जाती है, इसके बावजूद अवैध कारोबार से जुड़े लोगों के हौसले कम नहीं हो रहे हैं. सबसे चिंता की बात यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों के किशोर भी तेजी से इस जाल में फंसते जा रहे हैं.
सूत्रों के अनुसार, शराब माफिया ग्रामीण इलाकों के किशोरों को नशे और रुपये का लालच देकर शराब की खेप ढोने और उसकी सप्लाई कराने में लगा रहे हैं. कम उम्र होने के कारण शुरुआत में इन किशोरों पर आसानी से संदेह नहीं होता. इसी का फायदा शराब माफिया उठा रहे हैं. जब पुलिस की कार्रवाई में किशोर पकड़े जाते हैं, तो बड़े कारोबारी खुद को पीछे कर लेते हैं या पैरवी के जरिये उन्हें छुड़ाने का प्रयास करते हैं.
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले ग्रामीण क्षेत्रों के किशोर पढ़ाई और खेलकूद में अधिक रुचि लेते थे. अब जल्दी पैसे कमाने की चाह में कई किशोर अपराध की ओर आकर्षित हो रहे हैं. शराब माफियाओं के संपर्क में आने के बाद कुछ किशोर खुद भी नशे की गिरफ्त में फंस जाते हैं. नशे की लत लगने के बाद उनका पढ़ाई से मोहभंग होने लगता है और भविष्य को लेकर सकारात्मक सोच भी प्रभावित होती है. धीरे-धीरे उनके कदम अपराध की ओर बढ़ने लगते हैं.
वर्चस्व और दबंगई को लेकर अक्सर हो रहा गैंगवार
किशोरों के अपराध की ओर बढ़ने के पीछे सोशल मीडिया की भूमिका भी चिंता का विषय बनती जा रही है. कई किशोर व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर समूह बनाकर अपनी गतिविधियां संचालित कर रहे हैं. इन समूहों के माध्यम से शराब की डिलिवरी, सूचनाओं का आदान-प्रदान और वर्चस्व की लड़ाई तक की गतिविधियां होने की बात सामने आ रही है.
कई बार ऐसे समूहों से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हुए हैं. वर्चस्व कायम करने को लेकर चाकूबाजी, मारपीट और आपसी विवाद की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं. कम उम्र में ही दबंगई और अपराध की ओर बढ़ते किशोरों को लेकर अभिभावकों और सामाजिक संगठनों में चिंता बढ़ रही है.
अवैध कारोबार में इंट्री के बाद निकलना मुश्किल
आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2026 में शराब से जुड़े मामलों में नौ किशोरों के खिलाफ न्यायालय में मुकदमा चल रहा है. इसके अलावा हर वर्ष बड़ी संख्या में किशोर शराब और अन्य आपराधिक घटनाओं से जुड़े मामलों में पकड़े जाते हैं.
सामाजिक जानकारों का कहना है कि अवैध कारोबार में एक बार प्रवेश करने के बाद किशोरों के लिए माफियाओं के इस दलदल से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है. शुरुआत में रुपये और नशे के लालच में शामिल होने वाले किशोर धीरे-धीरे अपराध के नेटवर्क का हिस्सा बन सकते हैं. इससे उनके शिक्षा, रोजगार और भविष्य पर गंभीर असर पड़ता है.
प्रशासन के साथ समाज को भी करनी होगी पहल
सामाजिक जानकारों का कहना है कि किशोरों को अपराध और नशे की दुनिया से दूर रखने के लिए प्रशासनिक कार्रवाई के साथ सामाजिक स्तर पर भी पहल जरूरी है. शराब माफियाओं के नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई के साथ किशोरों के बीच जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है.
स्थानीय लोगों ने कई बार प्रशासन से सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर शराब माफियाओं के नेटवर्क को ध्वस्त करने की मांग की है. साथ ही किशोरों को नशे और अपराध से दूर रखने के लिए स्कूलों, पंचायतों और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की भी जरूरत बतायी है. लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में यह और गंभीर रूप ले सकती है.
