gopalganj news : भोरे. कहते हैं कि यदि हौसले के तरकश में संकल्प का तीर हो, तो विपरीत परिस्थितियों का हिमालय भी रास्ता दे देता है. भोरे प्रखंड के लच्छीचक गांव की सुनैना देवी ने अपने संघर्ष और आत्मबल से इस कहावत को सच साबित कर दिखाया है.
उनकी जीवन यात्रा आज हर उस महिला के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों में खुद को असहाय महसूस करती है. वर्ष 1989 में पंजाब के रोपड़ में कार्यरत उनके पति बाबूलाल सिंह का असामयिक निधन हो गया. उस समय सुनैना देवी की उम्र मात्र 32 वर्ष थी. परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. तीन छोटे-छोटे बेटों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गयी. बड़े पुत्र विजय बिहारी सिंह की उम्र करीब 12 वर्ष थी, जबकि बृजेश और वीरेंद्र इससे भी छोटे थे. परिवार के पास आय का कोई स्थायी साधन नहीं था. केवल सीमित खेती ही सहारा थी.gopalganj news : मदर्स डे : संघर्ष व संकल्प से सुनैना देवी ने बदली परिवार की तकदीर

gopalganj news : मदर्स डे : संघर्ष व संकल्प से सुनैना देवी ने बदली परिवार की तकदीर
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gopalganj news : पति के निधन के बाद तीन बेटों की अकेले परवरिश कर उन्हें दिलायी अलग पहचान, संघर्ष, त्याग और मेहनत के दम पर परिवार को दी नयी दिशा, आज बनीं प्रेरणा