सोमवारी के खास संयोग में नागपंचमी: जानिए पूजन का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व, लावा-कटहल पत्ता की जमकर हुई बिक्री

इस बार नागपंचमी सात साल के खास संयोग में 17 अगस्त, सोमवार को पड़ रही है. श्रद्धालु नाग देवता की पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना करेंगे. यह पर्व प्रकृति संरक्षण का संदेश भी देता है.

Nag Panchami: सात साल बाद सोमवार के संयोग में इस बार नागपंचमी का पर्व पड़ रहा है. भगवान शिव के गले का हार माने जाने वाले नागों की पूजा का यह शास्त्रीय पर्व 17 अगस्त, सोमवार को मनाया जायेगा. सोमवार के दिन नागपंचमी पड़ने से श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है. पर्व को लेकर रविवार को शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक पूजा सामग्री की दुकानें सज गयीं. देर शाम तक बाजारों में खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ लगी रही. खासकर लावा और कटहल के पत्तों की जमकर खरीदारी हुई.

शाम 6:31 बजे तक रहेगी पंचमी तिथि

महाबीर मंदिर पटना के मुख्य पुजारी पं. ओम तिवारी ने बताया कि श्रावण शुक्ल पंचमी तिथि का आरंभ 16 अगस्त की शाम 6:33 बजे से होगा, जो 17 अगस्त की शाम 6:31 बजे तक रहेगी. 17 अगस्त को मध्याह्न व्यापिनी पंचमी होने के कारण नागपंचमी का पर्व इसी दिन मनाया जायेगा. उन्होंने बताया कि श्रद्धालु विधि-विधान से नाग देवता की पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना करेंगे.

मध्याह्न काल में नाग पूजन का मुख्य मुहूर्त

ज्योतिषाचार्य पं. राजेश्वरी मिश्र ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार नाग पूजन का मुख्य काल मध्याह्न माना गया है. इस वर्ष सोमवार के विशेष संयोग के कारण नागपंचमी का महत्व और बढ़ गया है. इससे श्रद्धालुओं में पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है. वर्ष 2026 से पहले सोमवार के दिन नागपंचमी 5 अगस्त 2019 को पड़ी थी. उस समय सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के साथ सावन का तीसरा सोमवार भी था.

बाजार में लावा और कटहल पत्ता की खूब हुई बिक्री

नागपंचमी को लेकर रविवार को गोपालगंज के बाजारों में पूजा सामग्री की दुकानें सज गयी थीं. नाग पूजा के लिए जरूरी सामग्री की खरीदारी को लेकर सुबह से ही लोगों की आवाजाही शुरू हो गयी. शाम तक बाजार में काफी चहल-पहल रही. लावा और कटहल के पत्ते की लोगों ने जमकर खरीदारी की. ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोग पर्व की तैयारियों में जुटे रहे.

प्रकृति संरक्षण का संदेश देता है पर्व

ज्योतिषाचार्य डॉ. पंकज शुक्ला ने बताया कि नागपंचमी केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी देता है. नाग देवता की पूजा के माध्यम से लोग प्रकृति के प्रति संवेदनशील रहने और जीव-जंतुओं के संरक्षण का संकल्प लेते हैं.

उन्होंने बताया कि नागपंचमी के दिन श्रद्धालु घरों में नाग देवता की आकृति बनाकर उनकी पूजा करते हैं. नाग देवता को दूध, मिठाई और अन्य भोग अर्पित करने की परंपरा है. मान्यता है कि विधि-विधान से पूजा करने से परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है. साथ ही यह पर्व लोगों को प्रकृति और जीव-जंतुओं के संरक्षण के प्रति जागरूक भी करता है.

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By संजय कुमार अभय

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