Gopalganj Inflation : गोपालगंज में रोजमर्रा के राशन की बढ़ती कीमतों ने आम परिवारों का घरेलू बजट बिगाड़ दिया है. मार्च की तुलना में अगस्त में चावल, चीनी, दाल, आटा, नमक और खाद्य तेलों की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है. इसका सीधा असर मिडिल क्लास परिवारों की रसोई पर पड़ा है. कई परिवार अब जरूरी सामान की मात्रा घटाकर खर्च संभालने की कोशिश कर रहे हैं.
छह किलो चीनी लेने पहुंचे थे, चार किलो ही खरीद पाए
राजीव नगर निवासी सिन्हा जी का परिवार इसका उदाहरण है. वह एक महीने का राशन खरीदकर घर पहुंचे तो परिवार के लिए छह किलो चीनी खरीदने की योजना कीमत बढ़ने के कारण बदलनी पड़ी. उनकी पत्नी ने जब चीनी की मात्रा देखी तो त्योहार के समय कम चीनी को लेकर नाराजगी जताई. सिन्हा जी के अनुसार, पहले करीब 4500 रुपये में महीने भर का राशन आ जाता था, लेकिन अब यही खर्च बढ़कर करीब 6700 रुपये तक पहुंच गया है.
चावल और चीनी की कीमत में सबसे ज्यादा उछाल
स्थानीय खुदरा बाजार के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, चावल की कीमत मार्च में करीब 50-51 रुपये प्रति किलो थी, जो अब करीब 70-75 रुपये तक पहुंच गई है. चीनी भी करीब 45 रुपये से बढ़कर 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है. रोजमर्रा की जरूरत की इन दोनों वस्तुओं की कीमत बढ़ने से परिवारों के मासिक बजट पर सीधा असर पड़ रहा है.
दालों के दाम भी बढ़े
दालों की कीमतों में भी तेजी दर्ज की गई है. उपलब्ध बाजार आंकड़ों के मुताबिक अरहर दाल करीब 117 रुपये से बढ़कर 120-125 रुपये, मूंग दाल 96 से 120 रुपये और उड़द दाल 124 से 140 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है. चना दाल भी करीब 77 रुपये से बढ़कर 90 रुपये प्रति किलो बिक रही है.
राजमा और काबुली चना भी हुए महंगे
दालों के अलावा काबुली चना और राजमा की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है. काबुली चना करीब 85 रुपये से बढ़कर 100 रुपये और राजमा 130 रुपये से बढ़कर करीब 170 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है. मटर की कीमत भी करीब 48 रुपये से बढ़कर 60 रुपये प्रति किलो बताई जा रही है.
आटा और नमक पर भी बढ़ा खर्च
रसोई में रोज इस्तेमाल होने वाले आटे और नमक की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है. खुला आटा करीब 28-30 रुपये से बढ़कर 35 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है. नमक की कीमत भी 28 रुपये से बढ़कर करीब 32 रुपये प्रति किलो होने की बात सामने आई है.
खाद्य तेलों ने भी बढ़ाया घरेलू खर्च
खाद्य तेलों की कीमतों में भी तेजी का असर दिखाई दे रहा है. बाजार में सरसों का तेल करीब 160 रुपये से बढ़कर 185 रुपये प्रति लीटर और रिफाइंड तेल करीब 120 रुपये से बढ़कर 145 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है. तेल की कीमत बढ़ने से महीने के राशन का कुल खर्च और बढ़ गया है.
दुकानदार बोले, थोक कीमत और भाड़े का असर
मौनिया चौक के किराना दुकानदार धनंजय बर्णवाल ने बताया कि थोक बाजार में कीमत बढ़ने के साथ परिवहन लागत का असर खुदरा बाजार पर भी पड़ रहा है. उनका कहना है कि बारिश और महंगाई के कारण दुकानों पर ग्राहकों की संख्या में भी कमी आई है. ग्राहक पहले की तुलना में सामान की मात्रा कम खरीद रहे हैं.
गृहिणियों के लिए बजट संभालना मुश्किल
राजेंद्र नगर निवासी गृहिणी सीमा मिश्रा का कहना है कि लगातार बढ़ती कीमतों के कारण घरेलू बजट संभालना मुश्किल होता जा रहा है. जरूरी सामान की कीमत बढ़ने के बाद परिवारों को दूसरे खर्चों में कटौती करनी पड़ रही है. त्योहार के समय अतिरिक्त खर्च बढ़ने से परेशानी और बढ़ जाती है.
सस्ती चीनी का विकल्प भी नहीं
स्थानीय कारोबारियों के अनुसार, प्रमुख मिलरों की कीमतें लगभग समान रहने के कारण खुदरा दुकानदारों के पास सस्ती चीनी उपलब्ध कराने का विकल्प सीमित हो गया है. चीनी की कीमत बढ़ने के साथ गुड़ भी महंगा हो गया है. कारोबारियों के मुताबिक, करीब दस दिन पहले 50 रुपये किलो बिकने वाला साधारण गुड़ अब खुदरा बाजार में करीब 80 रुपये किलो तक पहुंच गया है.
पेट्रोल और परिवहन लागत का भी असर
बड़ी बाजार के किराना कारोबारी कृष्णा प्रसाद के अनुसार, ईंधन की कीमत बढ़ने से परिवहन और माल ढुलाई की लागत बढ़ी है. इसका असर खुदरा कीमतों पर पड़ा है. उन्होंने बाजार में एक से दो रुपये तक की तेजी का भी उल्लेख किया. उनके अनुसार, फसल उत्पादन कमजोर रहने और बारिश की स्थिति का असर भी कुछ खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर पड़ रहा है.
चावल, मक्का और गन्ने की मांग का असर
कारोबारी कृष्णा प्रसाद ने यह भी कहा कि इथेनॉल निर्माण में चावल, मक्का और गन्ने के इस्तेमाल से इनसे जुड़े बाजारों में मांग का असर दिखाई दे सकता है. उनके अनुसार, चीनी के कोटे में कमी का भी बाजार पर प्रभाव पड़ा है. हालांकि, इन कारणों के प्रभाव को अलग-अलग वस्तुओं के हिसाब से देखना जरूरी है.
जमाखोरी और कालाबाजारी की भी चर्चा
बाजार से जुड़े लोगों के बीच जमाखोरी और कालाबाजारी को लेकर भी आशंका जताई जा रही है. कुछ कारोबारियों का कहना है कि पुराने स्टॉक को रोककर ऊंचे दाम पर बेचने की कोशिश से कृत्रिम कमी की स्थिति बन सकती है. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. ऐसे में वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित विभाग की निगरानी और जांच महत्वपूर्ण होगी.
पांच महीने में कैसे बदले राशन के दाम
| सामान | पहले की कीमत | अब की कीमत |
| अरहर दाल | ₹117 | ₹120-125 |
| मूंग दाल | ₹96 | ₹120 |
| उड़द दाल | ₹124 | ₹140 |
| चना दाल | ₹77 | ₹90 |
| काबुली चना | ₹85 | ₹100 |
| राजमा | ₹130 | ₹170 |
| चावल | ₹51 | ₹75 |
| चीनी | ₹45 | ₹65 |
| मटर | ₹48 | ₹60 |
| आटा | ₹28 | ₹35 |
Also Read : अचानक स्कूल में पहुंच क्लास लेने लगे बिहार के ये DEO, शिक्षकों को भी समझाया पढ़ाने का तरीका
