Gopalganj News (प्रशांत पाठक) : मानसून ने अभी ठीक से दस्तक भी नहीं दी है, लेकिन सड़कों की बदहाली की पोल खुलनी शुरू हो गई है. सोमवार की देर रात आए आंधी-पानी ने क्षेत्र की व्यवस्था को आईना दिखा दिया है. उचकागांव प्रखंड के श्यामपुर और असंदापुर बाजार से होकर बथुआ जाने वाली मुख्य सड़क महज एक हल्की सी बारिश में ही पूरी तरह टापू में तब्दील हो चुकी है. वर्तमान में इस मार्ग पर सफर करना स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों के लिए किसी बड़े हादसे को आमंत्रण देने जैसा साबित हो रहा है.
सड़क पर भरे गंदे पानी से लोगों का चलना हुआ मुश्किल
सोमवार को हुई हल्की बूंदाबांदी के बाद ही सड़क का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह जलमग्न हो गया. सड़क पर जगह-जगह बने गहरे गड्ढों में पानी भर जाने के कारण यह मुख्य मार्ग किसी तालाब जैसा नजर आने लगा है. स्थिति इस कदर भयावह हो चुकी है कि आए दिन दोपहिया वाहन चालक अनियंत्रित होकर इन गड्ढों में फिसलकर गिर रहे हैं. जिससे वे चोटिल हो रहे हैं. वहीं, पैदल चलने वाले राहगीरों और स्कूली बच्चों को घुटनों तक के गंदे और बदबूदार पानी से होकर गुजरने को मजबूर होना पड़ रहा है.
क्षेत्र की लाइफलाइन है यह मुख्य मार्ग
गौरतलब है कि श्यामपुर-बथुआ मुख्य मार्ग इस पूरे क्षेत्र की ‘लाइफलाइन’ मानी जाती है. यह सड़क दर्जनों गांवों को प्रखंड मुख्यालय, मुख्य बाजारों, रेलवे स्टेशनों और आपातकालीन स्वास्थ्य केंद्रों से जोड़ती है. रोजमर्रा की जरूरतों और इलाज के लिए हजारों लोग इसी रास्ते का उपयोग करते हैं. ऐसे में सड़क की यह दुर्दशा पूरे इलाके की रफ्तार को थाम रही है.
क्या कहते हैं स्थानीय?
सड़क के दोनों तरफ जल निकासी के लिए नालियों का निर्माण न होना इस समस्या की सबसे बड़ी जड़ है. नाली नहीं होने के कारण आस-पास का सारा पानी सड़क पर ही जमा हो जाता है. पानी भरे होने की वजह से सड़क के जानलेवा गड्ढे दिखाई नहीं देते.जिससे विशेषकर रात के समय गंभीर हादसों का खतरा हर वक्त बना रहता है. स्थानीय ग्रामीण मो. अब्बास, राजेश चौबे, मुन्ना कुमार, पवन कुमार, संजय कुमार सहित अन्य लोगों ने बताया कि यह कोई पहली बार की समस्या नहीं है. असंदापुर मोड़ से बथुआ बाजार जाने वाली इस सड़क पर कमोबेश हर साल बरसात के मौसम में यही नजारा देखने को मिलता है. इस बार तो मानसून की पहली फुहार ने ही स्थिति को नारकीय बना दिया है.ग्रामीणों का आरोप है कि इस गंभीर समस्या को लेकर कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया गया. लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही हाथ लगा. नतीजा, आज जनता भुगत रही है.
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