Gopalganj News: (विकास दुबे) गोपालगंज जिले के सरकारी विद्यालयों में शिक्षा विभाग की नई डिजिटल व्यवस्था लागू करने की तैयारी तेज हो गई है. केंद्र प्रायोजित योजनाओं के संचालन को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए अब सभी विद्यालयों को सीएफएमएस (कॉमन फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम) पोर्टल से जोड़ा जाएगा. इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए जिले के सभी शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों की एचआरएमएस (HRMS) आईडी का डाटा जुटाने का निर्देश दिया गया है.
बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के राज्य परियोजना निदेशक नवीन कुमार के निर्देश के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) योगेश कुमार ने स्थापना डीपीओ मुकेश कुमार को जिले के सभी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों का अद्यतन एचआरएमएस विवरण उपलब्ध कराने को कहा है. विभागीय स्तर पर इसे प्राथमिकता वाले कार्यों में शामिल किया गया है.
विद्यालयों के पंजीकरण की चल रही प्रक्रिया
शिक्षा विभाग के अनुसार केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का क्रियान्वयन अब एसएनए स्पर्श मॉड्यूल के माध्यम से किया जाएगा. इसके लिए सीएफएमएस पोर्टल पर विद्यालयों के पंजीकरण की प्रक्रिया चल रही है.
पंजीकरण पूरा होने के बाद प्रत्येक विद्यालय में वित्तीय और प्रशासनिक कार्यों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की डिजिटल पहचान तय की जाएगी. इसी व्यवस्था के तहत विद्यालयों में मेकर, चेकर और अप्रूवर की भूमिका निभाने के लिए वरीय शिक्षक अथवा प्रधानाध्यापक को नामित किया जाएगा.
इन पदों पर टैग किए जाने के लिए संबंधित शिक्षक की एचआरएमएस आईडी होना अनिवार्य है. यही कारण है कि विभाग ने सभी जिलों से शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों का अद्यतन डाटा उपलब्ध कराने को कहा है.
डीपीओ स्थापना को सौंपी गई अहम जिम्मेदारी
डीईओ ने स्थापना डीपीओ को निर्देश दिया है कि जिले के सभी विद्यालयों से शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों की एचआरएमएस आईडी का विवरण एकत्र कर शीघ्र उपलब्ध कराया जाए. इसके बाद यह डाटा जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा एवं सर्व शिक्षा अभियान) को भेजा जाएगा, ताकि विद्यालयों के पंजीकरण के बाद संबंधित शिक्षकों को डिजिटल प्रणाली में जोड़ा जा सके.
अधिकारियों ने बताया कि यदि किसी शिक्षक या प्रधानाध्यापक की एचआरएमएस आईडी से संबंधित जानकारी अधूरी है, तो उसे भी जल्द अपडेट कराया जाएगा. इसके लिए विद्यालय स्तर से लेकर जिला स्तर तक आवश्यक कार्रवाई की जा रही है.
नई व्यवस्था से बढ़ेगी पारदर्शिता
शिक्षा विभाग का मानना है कि नई डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद विद्यालयों में योजनाओं से संबंधित राशि के उपयोग, स्वीकृति और निगरानी की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी. सभी कार्य ऑनलाइन होने से जवाबदेही बढ़ेगी और योजनाओं के क्रियान्वयन में अनावश्यक विलंब की संभावना भी कम होगी.
समयबद्ध तरीके से पूरी होगी प्रक्रिया
विभागीय अधिकारियों के अनुसार विद्यालयों का पंजीकरण, शिक्षकों की टैगिंग और डिजिटल वित्तीय प्रबंधन प्रणाली से जुड़ी सभी तैयारियां निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है. इससे केंद्र प्रायोजित योजनाओं का संचालन नई व्यवस्था के तहत सुचारु और प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा.
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