Gopalganj News: (विकाश दुबे) गोपालगंज जिले में बिना मान्यता प्राप्त चल रहे निजी (प्राइवेट) विद्यालयों पर अब शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपना लिया है. बिहार शिक्षा परियोजना और प्राथमिक शिक्षा निदेशालय के निर्देश के बाद गोपालगंज जिले के सभी प्रखंडों में ऐसे स्कूलों की पहचान शुरू कर दी गयी है, जो बिना विभागीय प्रस्वीकृति (रजिस्ट्रेशन) के वर्षों से संचालित हो रहे हैं. विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि निर्धारित समय तक ऑनलाइन आवेदन नहीं करने वाले विद्यालयों के खिलाफ कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जायेगी.
617 निजी विद्यालय ही विधिवत प्रस्वीकृत
शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार बताया गया कि जिले में अभी फिलहाल केवल 617 निजी विद्यालय ही विधिवत प्रस्वीकृत हैं. इसके बावजूद जिले के शहरों, बाजारों और गांवों में बड़ी संख्या में ऐसे सैकड़ों निजी स्कूल चल रहे हैं, जिनके पास न तो मान्यता है और न ही वैध पंजीकरण. ऐसे विद्यालयों में पढ़ रहे हजारों बच्चों के भविष्य और उनके प्रमाणपत्रों की वैधता को लेकर अब चिंता बढ़ गयी है. विभागीय जांच के दौरान यह बात सामने आयी है कि सैकड़ो निजी विद्यालय शिक्षा विभाग के तय मानकों को पूरा किये बिना ही संचालित हो रहे हैं. कहीं किराये के छोटे मकानों में स्कूल चल रहे हैं, तो कहीं दो-तीन कमरों में ही पूरी कक्षाएं संचालित की जा रही हैं. कई विद्यालयों में खेल मैदान, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, स्वच्छ पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है.
एक सप्ताह में मांगी गयी बिना मान्यता वाले स्कूलों की सूची
डीइओ योगेश कुमार ने आदेश जारी कर बताया है कि सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में बिना प्रस्वीकृति चल रहे निजी विद्यालयों की सूची एक सप्ताह के भीतर जिला कार्यालय में उपलब्ध कराएं. जिन विद्यालयों की मान्यता अवधि समाप्त हो चुकी है, उनकी भी अलग सूची भी तैयार करने को कहा गया है. उन्होंने बताया कि ऐसे सभी विद्यालयों को दस दिनों के भीतर इ-संबंधन पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करने का निर्देश दिया है. तय समय सीमा तक आवेदन नहीं करने वाले विद्यालयों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की अनुशंसा भी की जायेगी.
एक लाख तक जुर्माना, रोजाना 10 हजार वसूली का भी है प्रावधान
डीइओ ने बताया कि प्राथमिक शिक्षा निदेशक विक्रम विरकर द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 18 के तहत बिना प्रस्वीकृति विद्यालय संचालन गैरकानूनी है. नियमों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों पर एक लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है. इसके अलावा निर्धारित तिथि के बाद भी विद्यालय द्वारा जमा किए बिना ही विद्यालय संचालित रहता है तो प्रतिदिन 10 हजार रुपये तक का अतिरिक्त जुर्माना भी वसूला जा सकता है. विभाग ने ऐसे विद्यालयों को ऑनलाइन आवेदन करने का अंतिम अवसर दिया है.
अभिभावकों को भी किया जा रहा जागरूक
शिक्षा विभाग ने अभिभावकों से भी सतर्क रहने की अपील की है. निर्देश दिया गया है कि बच्चों का नामांकन किसी भी निजी विद्यालय में कराने से पहले उसकी प्रस्वीकृति संख्या और यू-डायस नंबर की जानकारी जरूर लें. साथ ही जिन विद्यालयों को विभागीय मान्यता प्राप्त है, उन्हें अपने मुख्य प्रवेश द्वार पर प्रस्वीकृति संख्या, मान्यता वर्ष और यू-डायस नंबर बड़े अक्षरों में प्रदर्शित करना अनिवार्य किया गया है, ताकि अभिभावकों को विद्यालय की वैधता की सही जानकारी मिल सके.
बच्चों के भविष्य को लेकर बढ़ी चिंता
बिना मान्यता प्राप्त विद्यालयों में पढ़ रहे बच्चों के प्रमाणपत्रों की वैधता पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं. नियमों के अनुसार मान्यता प्राप्त विद्यालयों से जारी प्रमाणपत्र ही मान्य माने जाते हैं. ऐसे में आगे नामांकन, छात्रवृत्ति और प्रतियोगी परीक्षाओं में छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. जिला शिक्षा पदाधिकारी योगेश कुमार ने बताया कि जिले में बिना प्रस्वीकृति संचालित विद्यालयों की पहचान की जा रही है. सूची तैयार होने के बाद विभागीय निर्देश के अनुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जायेगी.
