Model School Gopalganj: विद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार लाने और मॉडल स्कूलों को प्रभावी शैक्षणिक केंद्र के रूप में विकसित करने की पहल के तहत डॉ. शशि प्रकाश राय, उप निर्वाचन पदाधिकारी ने सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल स्कूल, जमसड़, प्रखंड उचकागांव का निरीक्षण किया.
निरीक्षण के दौरान उन्होंने विभिन्न कक्षाओं में जाकर विद्यार्थियों से संवाद किया. इस दौरान उन्होंने स्वयं बच्चों को पढ़ाया और शिक्षा के महत्व के साथ निरंतर अध्ययन के लिए प्रेरित किया. उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन, नियमित अध्ययन और बेहतर भविष्य के लिए लक्ष्य निर्धारित करने की सीख दी.
लाइब्रेरी और लैब का किया निरीक्षण
डॉ. राय ने मॉडल स्कूल की लाइब्रेरी, आईसीटी लैब और विज्ञान प्रयोगशाला का निरीक्षण किया. उन्होंने इन संसाधनों का अधिकतम शैक्षणिक उपयोग सुनिश्चित करने पर जोर दिया. साथ ही खेलकूद गतिविधियों की समीक्षा करते हुए विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में खेलों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया.
लेसन प्लान के अनुसार शिक्षण पर जोर
निरीक्षण के दौरान शिक्षकों की उपस्थिति और पाठ योजना के अनुसार शिक्षण-अधिगम की समीक्षा की गयी. पदाधिकारी ने कक्षा-कक्ष में प्रभावी और योजनाबद्ध शिक्षण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया.
उन्होंने विद्यालय परिसर में स्वच्छता और बेहतर शैक्षणिक वातावरण बनाए रखने के महत्व पर भी विशेष जोर दिया.
विद्या साथी ऐप और लाइव कक्षाओं का अधिक लाभ लेने की अपील
विद्यार्थियों से संवाद के दौरान उन्हें विद्या साथी ऐप और लाइव कक्षाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने के लिए प्रेरित किया गया. शिक्षकों को विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों की साप्ताहिक समीक्षा कर अपेक्षित सुधार सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया.
सरकार की ओर से विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध करायी जा रही डिजिटल और शैक्षणिक सुविधाओं का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए भी शिक्षकों को प्रेरित किया गया.
गुणवत्तापूर्ण और तकनीक आधारित शिक्षा पर जोर
डॉ. राय ने कहा कि मॉडल स्कूल की अवधारणा को प्रभावी बनाने के लिए शिक्षण गुणवत्ता, विद्यार्थियों की सहभागिता, डिजिटल शिक्षा और आधारभूत सुविधाओं का समन्वित विकास जरूरी है.
उन्होंने कहा कि मॉडल स्कूल की पहल का उद्देश्य केवल विद्यालय के भौतिक स्वरूप में सुधार करना नहीं, बल्कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक, तकनीक आधारित और परिणामोन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराना है. इसके लिए विद्यालय स्तर पर नियमित अनुश्रवण, शिक्षकों की सक्रिय भूमिका और विद्यार्थियों की निरंतर सहभागिता आवश्यक है.
