गोपालगंज: जिले में सरकारी विद्यालयों के भवन निर्माण की राह में सबसे बड़ी बाधा भूमि की कमी बन गई है. जिले के 84 नवसृजित प्राथमिक विद्यालय और 107 भूमिहीन उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय आज भी अपने भवन का इंतजार कर रहे हैं. भवन नहीं होने के कारण कई विद्यालय वर्षों से दूसरे स्कूलों के साथ टैग कर संचालित किए जा रहे हैं.
इस समस्या के समाधान के लिए बिहार शिक्षा परियोजना ने कार्रवाई तेज करते हुए संबंधित विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों, प्रभारी प्रधानाध्यापकों और प्रधान शिक्षकों को अपने स्तर पर भूमि उपलब्ध कराने की दिशा में पहल करने का निर्देश दिया है.
प्रधानाध्यापकों को सौंपी गई जिम्मेदारी
प्रारंभिक शिक्षा एवं समग्र शिक्षा के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) शिवम ने सभी संबंधित विद्यालयों को पत्र जारी कर गैरमजरूआ भूमि की पहचान करने, निजी भूमि दान के इच्छुक लोगों से संपर्क स्थापित करने तथा जनप्रतिनिधियों, पंचायत प्रतिनिधियों, समाजसेवियों और अंचलाधिकारियों के सहयोग से भूमि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है.
साथ ही चिन्हित भूमि और अब तक की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट जिला कार्यक्रम पदाधिकारी कार्यालय को भेजना अनिवार्य किया गया है.
टैग विद्यालयों के सहारे चल रही पढ़ाई
शिक्षा विभाग के अनुसार, जिन नवसृजित प्राथमिक विद्यालयों के पास अपनी जमीन नहीं है, उन्हें फिलहाल नजदीकी प्राथमिक या मध्य विद्यालय से टैग कर संचालित किया जा रहा है. इससे बच्चों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है और विद्यालय संचालन भी प्रभावित हो रहा है.
भवन निर्माण के लिए तय है भूमि का मानक
विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्राथमिक विद्यालय के लिए 10 से 20 डिसमिल तथा उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय के लिए 75 डिसमिल भूमि की आवश्यकता है. जमीन उपलब्ध होने के बाद ही भवन निर्माण की स्वीकृत योजनाओं पर कार्य शुरू किया जा सकेगा.
पहले भी भेजे जा चुके हैं कई पत्र
शिक्षा विभाग ने बताया कि भूमि उपलब्ध कराने के लिए संबंधित अंचलाधिकारियों को पहले भी कई बार पत्र भेजे जा चुके हैं. जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित जिला समन्वय समिति की बैठकों में भी इस मुद्दे पर लगातार निर्देश दिए गए, लेकिन बड़ी संख्या में विद्यालय अब भी भूमिहीन हैं.
शिक्षा का अधिकार कानून का हवाला
विभाग ने अपने निर्देश में कहा है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 तथा बिहार राज्य बच्चों का मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा नियमावली-2011 के तहत छह से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है. ऐसे में विद्यालयों के लिए शीघ्र भूमि उपलब्ध कराकर भवन निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाना आवश्यक है.
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