Gopalganj News: बिहार की न्याय व्यवस्था और पुलिसिया कार्यशैली को लेकर गोपालगंज से एक बड़ी खबर सामने आ रही है. बेंगलुरु में हुई एक संदिग्ध हत्या के मामले में कोर्ट के बार-बार आदेश देने के बावजूद रिपोर्ट दाखिल न करना विजयीपुर के थानाध्यक्ष को भारी पड़ गया है. मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) भारती कुमारी की अदालत ने पुलिस के इस अड़ियल और गैर-जिम्मेदाराना रवैये को बेहद गंभीरता से लिया है.
शुक्रवार को मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने विजयीपुर थानाध्यक्ष के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए ‘शो-कॉज’ नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने थानेदार को तीन दिनों के भीतर अदालत में सदेह (व्यक्तिगत रूप से) उपस्थित होकर जवाब दाखिल करने का अल्टीमेटम दिया है, ऐसा न करने पर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
कोर्ट के आदेश को रद्दी की टोकरी में डाल रहे थे थानेदार
परिवादी पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता मोहनीश कुमार शाही ने अदालत में दलील देते हुए पुलिसिया आचरण पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कोर्ट को बताया कि सीजेएम कोर्ट ने सबसे पहले 8 अप्रैल 2026 को विजयीपुर थानाध्यक्ष से इस मामले में रिपोर्ट तलब की थी, लेकिन पुलिस ने इसे नजरअंदाज कर दिया. इसके बाद न्यायालय द्वारा 6 मई 2026 को रिमाइंडर भेजा गया, मगर थानेदार ने फिर भी रिपोर्ट जमा नहीं की.
मामला क्या है? बेंगलुरु में मजदूरी के विवाद में हत्या का आरोप
परिवाद के अनुसार, विजयीपुर थाना क्षेत्र के अहियापुर गांव निवासी राजकुमार कमकर के भाई मनु कमकर को 25 नवंबर 2025 को कटेया थाना क्षेत्र के पचफेड़वा गांव का ठेकेदार धीरज कुमार बेंगलुरु में अच्छी मजदूरी का झांसा देकर अपने साथ ले गया था. 3 दिसंबर 2025 को दोनों भाई बेंगलुरु पहुंचे और काठपाड़ी रेलवे स्टेशन के पास रहकर धीरज के लिए पेंटिंग का काम करने लगे.
पैसे मांगने पर गायब किया, फिर मिली मौत की खबर
ठेकेदार धीरज कुमार समय पर मजदूरी नहीं देता था, जिससे अक्सर विवाद होता था. 11 जनवरी 2026 की शाम को धीरज कमरे पर आया और मनु कमकर को घुमाने के बहाने अपने साथ ले गया. जब मनु ने अपने बकाए पैसे मांगे, तो धीरज ने सब चुकता करने की बात कही. उसी रात 11 बजे भाई राजकुमार को सूचना मिली कि मनु की ‘सड़क दुर्घटना’ में मौत हो गई है.
हत्या को हादसे का रूप देने का दावा
राजकुमार कमकर का आरोप है कि ठेकेदार धीरज ने मजदूरी के पैसे हड़पने की नीयत से उसके भाई मनु की हत्या कर दी और इसे दुर्घटना का रूप दे दिया. 13 जनवरी को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा गया था.
थाने में नहीं लिखी गई FIR, तब जाना पड़ा कोर्ट
पीड़ित भाई राजकुमार ने 3 मार्च 2026 को विजयीपुर थाने में लिखित शिकायत (तहरीर) दी थी, लेकिन पुलिस ने रसूखदार ठेकेदार के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की. थक-हारकर पीड़ित ने अधिवक्ता मोहनीश कुमार शाही के माध्यम से सीजेएम कोर्ट में कंप्लेंट केस (परिवाद पत्र) दाखिल किया. अब कोर्ट के कड़े रुख के बाद विजयीपुर पुलिस बैकफुट पर है.
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