Gopalganj News : मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से निर्मित मॉडल सदर अस्पताल का भवन उद्घाटन के एक वर्ष के भीतर ही सवालों के घेरे में आ गया है. करीब 37 करोड़ रुपये की लागत से बने 100 बेड वाले इस अस्पताल की तीसरी मंजिल पर कई जगह दरारें दिखाई देने के बाद मरीजों और उनके परिजनों में चिंता बढ़ गई है. लोग निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की जांच की मांग कर रहे हैं.
तीसरी मंजिल पर 15 से 20 स्थानों पर दिखीं दरारें
स्थानीय लोगों और मरीजों के अनुसार अस्पताल भवन की तीसरी मंजिल पर एक-दो नहीं, बल्कि करीब 15 से 20 स्थानों पर दरारें दिखाई दे रही हैं. मरीज इसे निर्माण कार्य में अनियमितता का परिणाम बताते हुए इसकी उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग कर रहे हैं.
फायर सेफ्टी व्यवस्था भी मिली खामियों से घिरी
अस्पताल में भवन संबंधी समस्याओं के साथ फायर सेफ्टी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है. फायर सेफ्टी जांच के दौरान लगाए गए अधिकांश सुरक्षा उपकरण अनुपयोगी पाए गए. इसके बाद संबंधित विभाग ने कमियों को दूर करने के लिए एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है.
इमरजेंसी वार्ड में छत से टपक रहा गंदा पानी
अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टरों के चेंबर की छत से गंदा पानी टपकने की समस्या भी सामने आई है. इससे चिकित्सकों को कार्य करने में परेशानी हो रही है और अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
लिफ्ट खराब, शौचालयों में जलजमाव से मरीज परेशान
अस्पताल की लिफ्ट बार-बार खराब होने के कारण मरीजों और उनके परिजनों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. वहीं शौचालयों के पाइप जाम होने से जगह-जगह पानी का रिसाव हो रहा है, जिससे गंदगी फैलने और संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया है.
डीएम बोले- मेंटेनेंस कार्य की हो रही निगरानी
इस मामले में जिला पदाधिकारी समीर सौरभ ने बताया कि अस्पताल भवन का मेंटेनेंस कार्य जारी है और इसकी लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है. निर्माण एजेंसी को सभी कमियों को समयबद्ध तरीके से दूर करने तथा गुणवत्ता के साथ कार्य पूरा करने का निर्देश दिया गया है.
बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की उम्मीद, लेकिन अव्यवस्थाओं से बढ़ी चिंता
मॉडल सदर अस्पताल से जिले के लोगों को आधुनिक और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की उम्मीद थी. हालांकि भवन में दरारें, फायर सेफ्टी की खामियां, लिफ्ट की खराबी और अन्य बुनियादी समस्याओं के सामने आने से मरीजों और उनके परिजनों में चिंता बढ़ गई है. अब लोगों की नजर इस बात पर है कि निर्माण एजेंसी इन कमियों को कब तक दूर करती है.
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