Teacher's Day: शिक्षक दिवस के पूर्व संध्या पर क्षेत्र के पुराने छात्र-छात्राओं ने अपने दिवंगत गुरुजनों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की. गुरुजनों की याद में शिष्यों के सिर श्रद्धा से झुक गये. पूर्व छात्रों ने कहा कि गुरुजनों का कर्ज कभी नहीं चुकाया जा सकता. उनकी दी हुई शिक्षा, संस्कार और आशीर्वाद ही आज उनकी सफलता का आधार है.
पूर्व छात्रों ने बताया कि गुरुजनों के योगदान और शिक्षा की बदौलत आज उनके कई शिष्य खुद शिक्षक-शिक्षिका के पद पर कार्यरत हैं. वहीं अन्य शिष्य सिविल सेवा, सेना, रेल सेवा, वकालत समेत विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. सभी ने जहां हैं, वहीं से अपने गुरुजनों को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए गुरु-भक्ति और आस्था व्यक्त की.
गुरुजनों की शिक्षा को बताया जीवन की सबसे बड़ी पूंजी
शिष्यों ने कहा कि गुरुजनों से मिली शिक्षा और आशीर्वाद के कारण ही वे आज कामयाब हो सके हैं. गुरुजनों का यह कर्ज वे जीवन भर नहीं चुका पायेंगे. सभी ने संकल्प लिया कि दिवंगत गुरुजनों के पदचिह्नों पर चलते हुए अपने-अपने कार्यक्षेत्र में आदर्श पहचान बनायेंगे.
शिक्षक के रूप में कार्यरत पूर्व छात्रों ने कहा कि वे विद्यालयों में बच्चों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का प्रयास करेंगे. आदर्श शिक्षक के रूप में कार्य करके वे अपने गुरुजनों की आत्मा की शांति के लिए प्रयासरत रहेंगे.
1984 बैच के छात्रों ने दिवंगत शिक्षकों को किया याद
इस अवसर पर वर्ष 1984 में मैट्रिक पास बैच के छात्र-छात्राओं ने विशेष रुचि दिखाई. प्रखंड क्षेत्र के सरस्वती विद्या निकेतन आदर्श विद्यालय और श्री योगेंद्र ऋषि कुल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, रेवतिथ के पूर्व प्रधानाध्यापक व शिक्षकों को याद किया गया.
इस दौरान स्वर्गीय गोपीकृष्ण सिंह, श्रीकांत त्रिवेदी, जनार्दन प्रसाद सिंह, ध्रुवदेव प्रसाद सिंह, चंद्रशेखर सिंह, अहमद साहब, रामनरेश राय, ध्रुपदेव सिंह, मुसाफिर शर्मा, रघुनाथ सिंह और मदनमोहन शर्मा समेत अन्य दिवंगत शिक्षकों को श्रद्धांजलि दी गयी.
वहीं पूर्व छात्रों ने अपने जीवित शिक्षकों भुवनेश्वर मिश्रा, गौतम त्रिवेदी, शिवशंकर प्रसाद यादव और अमर सिंह से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया.
मौके पर शिक्षक मुरलीधर प्रसाद राय, सुनील कुमार दुबे, ज्योति भूषण सिंह, मधुरानी, सुमन सिंह, शांति प्रसाद, नीलम सिंह, भोला प्रसाद, राजेश प्रसाद, अनिल पांडेय, इंजीनियर राकेश पांडेय, जितेंद्र त्रिवेदी, शशिरंजन सिंह, डॉ बड़ाबाबू सिंह, अरुण श्रीवास्तव आदि शामिल हुए.
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