गोपालगंज : सारण और चंपारण की धरती को जोड़नेवाला डुमरिया पुल इन दिनों बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है. जर्जर हो चुके पुल पर कब हादसा हो जायेगा, कहना मुश्किल है. पुल की अधिकतर रेलिंग टूट गयी है. बांस बांध कर यहां सुरक्षा का कोरम पूरा किया जा रहा है. पुल का सतह जर्जर […]
गोपालगंज : सारण और चंपारण की धरती को जोड़नेवाला डुमरिया पुल इन दिनों बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है. जर्जर हो चुके पुल पर कब हादसा हो जायेगा, कहना मुश्किल है. पुल की अधिकतर रेलिंग टूट गयी है. बांस बांध कर यहां सुरक्षा का कोरम पूरा किया जा रहा है. पुल का सतह जर्जर और गड्ढानुमा बन जाने के कारण यहां प्रतिदिन जाम लगता है,
जिससे लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है. बता दें कि गंडक नदी पर डुमरिया में महासेतु का निर्माण सत्तर के दशक में हुआ, तब सारण और चंपारण के बीच लंबी दूरी थी. पुल बनने के बाद व्यापार तो बढ़ा ही, लोगों के रिश्ते भी मजबूत हुए और आसान परिवहन का बड़ा सूत्रधार हुआ. फिलवक्त जर्जर हो चुके पुल को लेकर एनएचएआइ सुस्त है और भय के बीच आवागमन जारी है. पेराई सत्र में सबसे अधिक नुकसान चीनी मिलों को होता है.
चंपारण से आता है 50 लाख क्विंटल गन्ना : जिला स्थित तीनों चीनी मिलों को पेराई के लक्ष्य का एक चौथाई गन्ना चंपारण के किसान उपलब्ध कराते हैं. मिल प्रबंधन चंपारण में अपना खरीद केंद्र खोल रखा है. प्रतिवर्ष 50 लाख क्विंटल गन्ना चंपारण से पेराई के लिए आता है. इस बार जर्जर पुल पर जाम लगने से चंपारण के किसान कम संख्या में आ रहे हैं, जिससे मिल प्रबंधन चिंतित है.