डीएम के बॉडीगार्ड से अंडरवर्ल्ड तक का सफर
गोपालगंज : हथुआ थाने के नया गांव तुलसिया गांव निवासी रामाशीष पांडेय का पुत्र सतीश पांडेय सीवान डीएम की सुरक्षा में तैनात थे. पहलवानी की बदौलत सतीश पांडेय बिहार पुलिस से दिसंबर 1982 में भरती हुए. उसने 1984 में सीवान के चर्चित हेमंत सिंह हत्याकांड के साथ ही अपराध की दुनिया में कदम रखा और […]
गोपालगंज : हथुआ थाने के नया गांव तुलसिया गांव निवासी रामाशीष पांडेय का पुत्र सतीश पांडेय सीवान डीएम की सुरक्षा में तैनात थे. पहलवानी की बदौलत सतीश पांडेय बिहार पुलिस से दिसंबर 1982 में भरती हुए. उसने 1984 में सीवान के चर्चित हेमंत सिंह हत्याकांड के साथ ही अपराध की दुनिया में कदम रखा और देखते ही देखते अंडरवर्ल्ड की राह पकड़ ली. एक समय प्रकाश शुक्ला, गुड्डु राय, अजय राय, सुरेश यादव सतीश पांडेय के लिए काम करते थे.
मंत्री बृजबिहारी प्रसाद हत्याकांड, मीरगंज में सरेआम 1999 में दारोगा हत्याकांड, पुरखास नरसंहार, चाड़ी नरसंहार, सीवान के ताहिरा नरसंहार जैसे संगीन मामलों में सतीश पांडेय चर्चा में रहे. तब अंडरवर्ल्ड से जुड़े ऋषि मुनि तिवारी ने वर्ष 2003 में एनएचपीसी के महाप्रबंधक टी मंडल एवं केके सिंह का अपहरण किया था. इस गैंग में सतीश पांडेय की भूमिका प्रमुख रही और सतीश पांडेय की पहल पर दोनों अभियंताओं को रिहा किया गया था.
अपराध की दुनिया में दो दशक तक चर्चित रहे सतीश पांडेय की जमानत पर रिहाई के बाद अब समाज की मुख्यधारा से जुड़ने की बात कही जा रही है.
राजनीतिक रसूख से भाई को दिलाया था एमएलए का टिकट
अंडरवर्ल्ड से जुड़े रहने के बाद भी सतीश पांडेय का संबंध राजनीतिक हस्तियों से गहरा रहा है. यूपी, बिहार व दिल्ली के कई मंत्री और पूर्व मंत्रियों से संबंध रहा है. मायावती सरकार के सबसे करीबी रहे सतीश मिश्रा से गहरा संबंध होने की बदौलत अपने भाई अमरेंद्र कुमार उर्फ पप्पू पांडेय को बसपा से टिकट दिलवा कर विधायक बनाने का काम सतीश पांडेय ने किया.
अपने गहरे संबंध की बदौलत 2005 के अक्तूबर में जदयू से टिकट लेकर भाई को विधायक बनाने में सफल रहे. हालांकि वर्ष 2006 में अपनी पत्नी उर्मिला पांडेय को जिला पर्षद अध्यक्ष बनाने में सफल रहे. इससे पूर्व सतीश पांडेय सीवान के दरौली से चुनाव लड़े थे, परंतु हार का सामना करना पड़ा था. लेकिन, अपने संबंधों और राजनीतिक पकड़ की बदौलत अपनी बादशाहत कायम रखी.
