सड़क हादसे में सूचना देने या अस्पताल पहुंचाने पर नहीं देना होगा नाम व पता

गोपालगंज : पुलिस और पब्लिक के बीच सामंजस्य स्थापित कर अपराधों पर काबू पाया जा सकता है. आपसी सामंजस्य से अपराधों में कमी के साथ ही समाज में सौहार्द का वातावरण भी बना रहेगा. पुलिस को सहयोग करनेवाले व्यक्तियों को अब पुलिसिया लफड़े से मुक्ति मिलेगी. इस दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया […]

गोपालगंज : पुलिस और पब्लिक के बीच सामंजस्य स्थापित कर अपराधों पर काबू पाया जा सकता है. आपसी सामंजस्य से अपराधों में कमी के साथ ही समाज में सौहार्द का वातावरण भी बना रहेगा. पुलिस को सहयोग करनेवाले व्यक्तियों को अब पुलिसिया लफड़े से मुक्ति मिलेगी. इस दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रति गोपालगंज जिले की पुलिस अधीक्षक निताशा गुड़िया ने सभी अस्पतालों व थानों में भेज दी है. वहीं, एसपी की ओर से इसे अमल में लाने की कार्रवाई शुरू कर दी गयी है. संबंधित थाने के अधिकारी भी इस कार्रवाई में जुट गये हैं. आमजनों को विश्वास दिलाना शुरू कर दिया गया है कि दुर्घटना हो या आपराधिक वारदात पुलिस के साथ मिल कर काम किया जाये. पुलिस को सूचना देनेवाले का नाम भी गुप्त रखा जायेगा. आवश्यकता अगर महसूस नहीं करते हैं, तो ऐसी स्थिति में नाम भी नहीं बता सकते हैं.

अब दबाव नहीं डाल सकती पुलिस
आम तौर पर देखा जाता है कि बीच सड़क पर वाहन से दुर्घटनाग्रस्त होकर घायल तड़पता रहता है. लेकिन, कोई उसकी मदद को आगे नहीं बढ़ता. कई बार तो घायल प्राथमिक उपचार के अभाव में मौके पर ही दम तोड़ देता है. प्रवृत्ति में कमी लाने के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार घायल व्यक्ति को अस्पताल ले जानेवाले पर नाम व पता बताने के लिए दबाव नहीं देना है. चिकित्सक घायल व्यक्ति का पहले इलाज करेंगे, बाद में पुलिसिया कार्रवाई.
पुलिस को जितना होगा जनता का विश्वास : पुलिस-पब्लिक के बीच सेतु के लिए पूर्व में भी न्यायालय कई तरह का आदेश दे चुका है. आवश्यकता है, इसे धरातल पर लाकर अमल करने की. इसके लिए सबसे पहले पुलिस को अपनी कार्यशैली में बदलाव लाना होगा. बदलाव आते ही पब्लिक का पुलिस के प्रति विश्वास बढ़ेगा. विश्वास बढ़ते ही स्वाभाविक तौर पर एक दूसरे के बीच सामंजस्य स्थापित होगी.

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