हमारा किसान गिरता-टूटता है, पर कभी हारता नहीं
गोपालगंज : वो गिरता है, उठता है, फिर गिरता है और खड़ा हो जाता है, पर वो हारता नहीं है, हमेशा जीतता है. यही है हमारे जिले के किसान. आफत कोई भी हो इनके हौसले बुलंद रहते हैं. प्राकृतिक आपदा से फसल नुकसान, फिर भी अन्नदाता खेती में मिसाल बने हैं. किसानों ने सूखे खेत […]
गोपालगंज : वो गिरता है, उठता है, फिर गिरता है और खड़ा हो जाता है, पर वो हारता नहीं है, हमेशा जीतता है. यही है हमारे जिले के किसान. आफत कोई भी हो इनके हौसले बुलंद रहते हैं. प्राकृतिक आपदा से फसल नुकसान, फिर भी अन्नदाता खेती में मिसाल बने हैं. किसानों ने सूखे खेत और बेमौसम बारिश में फसलों को समाधि लेते हुए देखा है.
अकाल में भूख बरदाश्त की है और अतिवृष्टि में परिवार की जान भी बचायी है. प्रकृति से उन्होंने एक बार नहीं, बार – बार मुकाबला किया है, लेकिन खेती को कभी विदर्भ नहीं बनने दिया. यही वजह है कि आपदा से जिले के किसान हारे नहीं हैं, बल्कि दुगुनी ताकत के साथ फिर खेतों में दिन – रात फसल को बचाने में जुटे हैं.
सरकार की राहत और सहानुभूति का उन्हें भरोसा नहीं है, क्योंकि उन्हें पता है कि इस मामूली राहत से उनका दर्द कम नहीं होगा. वे खुद खेतों में अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं. ‘प्रभात खबर’ ने सुदूर गांवों में खेतों तक पहुंच कर किसानों का हौसला देखा है. प्रस्तुत है किसानों के इन हौसलों की कहानियां..
खेत में भरे पानी ने बढ़ायी किसानों की हिम्मत
बरौली. बखरौर पंचायत की कृष्णावती देवी की 4 बीघा फसल नुकसान हो गयी है, पर वो थकी नहीं हैं. खेतों में भरे पानी से सपने टूटे नहीं हैं, बल्कि उम्मीदें जगी हैं. जो हुआ उसका तो दुख है ही, लेकिन अहले सुबह से रात तक हाथ में हंसिया थामे वह गेहूं की एक – एक बाली सहेजती हैं. पति पोखर राम भले ही हिम्मत हार रहे हों, लेकिन कृष्णावती की आस ने उनका भी हौसला बढ़ा दिया है. कृष्णावती को भरोसा है कि जल्द ही उनकी गाड़ी पटरी पर लौटेगी और उनके भी दिन अच्छे आयेंगे.
जिले में खेती एक नजर
त्न गेहूं – 96 हजार हेक्टेयर
त्न फसल नुकसान – 20 हजार हेक्टेयर
आंकड़े बताते हैं इतनी आफत ङोली, फिर भी जीते किसान
2008, 2011, 2013, 2014, 2015 में अतिवृष्टि-ओलावृष्टि
अब फसल को बचाना ही मकसद
सासामुसा. कुचायकोट के बलिवन सागर के ब्रजकिशोर पांडेय का मकसद फसल नुकसान पर रोना नहीं है, खेतों में फसल को बचाना है. इसके लिए पूरा परिवार दिन-रात मेहनत कर रहा है, जितनी फसन उगाने में की थी, उससे भी ज्यादा. खराब एक – दो कट्ठा की नहीं है, बल्कि पूरा डेढ़ बीघा है. किसान ने लोन लेकर खेती की थी.
फसल नुकसान पर हौसले हैं बुलंद
भोरे. भोपतपुर गांव के किसान सच्चिदानंद राय की 8 बीघे में खड़ी फसल 70 प्रतिशत तक नुकसान हो गयी. कर्ज लेकर किसान ने खेती की थी. सरकार से कोई राहत नहीं मिली. फिर भी किसान के हौसले कम नहीं हुए. बुलंद हौसले से सच्चिदानंद कहते हैं कि मेरा मकसद बची फसल को बचाना है. इलाके में सच्चिदानंद किसानों के लिए प्रेरणा स्नेत हैं.
दो एकड़ फसल को नुकसान, पर हारे नहीं
हथुआ : हथुआ गांव के किसान श्रीराम साह की फसल पिछली बार भी नुकसान हो गयी थी. इस बार तीन एकड़ में खेती की. फसल की पैदावार भी अच्छी हुई. मगर, प्राकृतिक आपदा ने श्रीराम साह की दो एकड़ फसल को नुकसान पहुंचा दिया. खेती में खड़ी तैयार फसल नुकसान हो गयी. फिर भी हिम्मत नहीं हारे. श्रीराम अब अपने परिवार की फसलों को बचाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं.
