सिरसा सर्वोदय टोला में सरस्वती पूजा की तैयारी तेज, मूर्तिकारी बनी आजीविका
बैकुंठपुर. प्रखंड क्षेत्र के दिघवा दुबौली स्थित सिरसा सर्वोदय टोला मूर्तिकारी के लिए पूरे इलाके में विशेष पहचान रखता है.
बैकुंठपुर. प्रखंड क्षेत्र के दिघवा दुबौली स्थित सिरसा सर्वोदय टोला मूर्तिकारी के लिए पूरे इलाके में विशेष पहचान रखता है. यहां दर्जनों परिवारों की आजीविका का मुख्य साधन मूर्तिकला है. सरस्वती पूजा को लेकर इन दिनों गांव में विशेष रौनक देखने को मिल रही है और मूर्तिकार वसंतोत्सव की तैयारियों में पूरी तन्मयता से जुटे हुए हैं. गांव के मूर्तिकार जीतेश पंडित, मिथिलेश कुमार राम, जितेंद्र राम, मुकेश राम, राजेंद्र राम, शिवशंकर राम, शिवनारायण राम, हृदय राम, अर्जुन राम, हरेंद्र राम, मनोज राम, राजनाथ राम, देवनाथ राम व विपिन राम सहित कई कारीगर सरस्वती माता की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में लगे हैं. परंपरागत शैली से तैयार की जा रही ये प्रतिमाएं अपनी सजीवता, सौम्यता और कलात्मक बारीकियों के लिए जानी जाती हैं. मूर्तिकार अपनी कला के माध्यम से न केवल धार्मिक आस्था को आकार दे रहे हैं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत कर रहे हैं.
डेढ़ से लेकर 10 हजार तक की हैं प्रतिमाएं
इन दिनों 1500 रुपये से लेकर 10 हजार रुपये तक की विभिन्न आकार और स्वरूपों वाली प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं. मांग के अनुसार मां सरस्वती की प्रतिमाएं बैठी हुई, वीणा धारण किये और विविध कलात्मक सज्जा के साथ बनायी जा रही हैं. गांव में एक-एक मूर्तिकार को 50 से 100 प्रतिमाओं के ऑर्डर मिले हैं, इससे दिन-रात गतिविधियां चल रही हैं.
सिर्फ रोजगार ही नहीं, क्षेत्र में मिली अलग पहचान
मूर्तिकार जीतेश पंडित ने बताया कि कला ही उनका जीवन और जीविका दोनों है. उन्होंने कहा कि मूर्तिकला से उन्हें न केवल रोजगार मिला है, बल्कि क्षेत्र में एक अलग पहचान भी बनी है. सरस्वती पूजा के अवसर पर मूर्ति निर्माण का यह कार्य समाज को कला, संस्कृति और ज्ञान के महत्व का संदेश देता है. सिरसा सर्वोदय टोला में इन दिनों उत्साह और उल्लास का माहौल है, जहां हर ओर मां सरस्वती की प्रतिमाएं आकार ले रही हैं और कला बिखेर रही हैं.
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