कोर्ट की सख्ती के बाद महज 66 लाख रुपये की रिकवरी कर सका बैंक

गोपालगंज : भारतीय स्टेट बैंक में हुए 2.54 करोड़ के हुए फर्जी गोल्ड लोन के मामले में कोर्ट के सख्ती के बाद भी स्टेट बैंक ने महज 66 लाख रुपये की रिकवरी कर सकी. पुलिस की तरफ से आरोपितों पर कार्रवाई होने के कारण मामला ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है. जिन दो आरोपितों को […]

गोपालगंज : भारतीय स्टेट बैंक में हुए 2.54 करोड़ के हुए फर्जी गोल्ड लोन के मामले में कोर्ट के सख्ती के बाद भी स्टेट बैंक ने महज 66 लाख रुपये की रिकवरी कर सकी. पुलिस की तरफ से आरोपितों पर कार्रवाई होने के कारण मामला ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है. जिन दो आरोपितों को हाइकोर्ट ने सशर्त जमानत दी. उनके द्वारा भी राशि जमा नहीं की गयी. बैंक अब हाइकोर्ट में अवमानना की अपील करने की तैयारी में है.

स्टेट बैंक के मुख्य शाखा प्रबंधक विकास कुमार झा ने बताया कि पटना उच्च न्यायालय ने जलालपुर के निवासी संजय सिंह को 57 हजार रुपये पहली किस्त तथा शेष राशि चार किस्तों में जमा करने का निर्देश था.
संजय सिंह पर बैंक का 2.86 लाख रुपये कर्ज हैं तो भठवां के रहने वाले हंशराज भगत के ऊपर लगभग आठ लाख का कर्ज हैं. इनको आठ किस्तों में राशि जमा करने की शर्त पर जमानत दी. अक्तूबर, 2018 से जेल से बाहर आने के बाद दोनों ने कोई किस्त जमा नहीं की है.
जमानत के बिंदु पर हुई सुनवाई
कुचायकोट थाना क्षेत्र के फुलवरिया टोला कमलापट्टी के रहनेवाले अंगद चौरसिया की तरफ से जमानत के बिंदु पर सुनवाई हुई. जमानत के लिए बैंक को कर्ज की राशि की किस्त जमा करनी पड़ी है.
कांड का मास्टर माइंड की गिरफ्तारी नहीं होने पर नाराजगी
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पांच विश्व विभूति गुप्ता की कोर्ट अब तक कांड के मास्टर माइंड पुलिस पकड़ से बाहर है. इस पर कोर्ट ने नाराजगी जतायी है. ध्यान रहे कि शहर के मेन रोड स्थित मूरली मार्केट में मनमोहन गहना लोक ज्वेलरी के मालिक सतीश कुमार प्रसाद इस पूरे फर्जीवाड़े के मास्टरमाइंड हैं.
आरोप है कि सतीश प्रसाद ने बैंक के दलालों के माध्यम से पूरे सुनियोजित तरीके से नकली गहना तैयार कर ऋणियों को उपलब्ध कराया.
कृषि गोल्ड लोन लेने के लिए बैंक पहुंचे. बैंक में सक्रिय दलालों ने अधिकारियों से सेटिंग की. लोन देने के लिए जब अधिकारी तैयार हुए तो सतीश प्रसाद को सोना की शुद्धता जांच के लिए बुलाया गया. सतीश प्रसाद ने सोने की शुद्धता की गारंटी लेते हुए सर्टिफिकेट जारी कर 2.54 करोड़ के घोटाला को अंजाम दिया.

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