फर्जी नाम व पते पर खाते खुलवाता था मुकेश
फर्जी नाम व पते से खोले गये 150 से अधिक खातों से होती थी फंडिंग... लश्कर-ए-तैयबा के नेटवर्क को कैश पहुंचाने में करता था मदद गोपालगंज : एटीएस के छापे में गोपालगंज के मांझा थाने के आलापुर गांव के मुकेश प्रसाद समेत 10 लोगों के पकड़े जाने के बाद यहां से टेरर फंडिंग (आतंक के […]
फर्जी नाम व पते से खोले गये 150 से अधिक खातों से होती थी फंडिंग
लश्कर-ए-तैयबा के नेटवर्क को कैश पहुंचाने में करता था मदद
गोपालगंज : एटीएस के छापे में गोपालगंज के मांझा थाने के आलापुर गांव के मुकेश प्रसाद समेत 10 लोगों के पकड़े जाने के बाद यहां से टेरर फंडिंग (आतंक के लिए धन मुहैया कराने) का सनसनीखेज खुलासा हुआ है. पता चला है कि विभिन्न बैंकों में फर्जी नाम व पते से खोले गये करीब 150 से अधिक खातों के जरिये आतंकियों और उनके संगठनों को रकम पहुंचायी जाती थी. पाकिस्तान में बैठे लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आका (हैंडलर) के कहने पर बैंक खातों में रकम जमा करायी जाती थी और निकाली जाती थी.
टेरर फंडिंग से जुड़ा मुकेश प्रसाद फर्जी नाम व पते पर खाते खुलवाता था और खाता नंबर की जानकारी नेटवर्क से जुड़े लोगों को देता था. बाद में उन्हीं खातों में आतंक फैलाने के लिए रकम आती थी, जिसे देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त लोगों तक पहुंचाया जाता था. एटीएस के आईजी असीम अरुण ने बताया कि सभी खातों की छानबीन की जा रही है. फर्जी नाम व पते पर खाते खुलने और उसमें आसानी से रकम जमा व निकासी होने में उन्होंने बैंककर्मियों की भी भूमिका से इन्कार नहीं किया है.
गोरखपुर में रहकर खुद को बताता था छात्र : गोरखपुर में शाहपुर क्षेत्र के बिछिया मुहल्ले में मांझा थाने के आलापुर गांव के शिक्षक जलेश्वर प्रसाद का बेटा मुकेश प्रसाद किराये का मकान लेकर रहता था. उसके साथ कुशीनगर का मुशर्रफ उर्फ निखिल राय तथा जीयनपुर आजमगढ़ के तरया निवासी सुशील राय उर्फ अंकुर राय भी रहते थे. लोगों से खुद को वे छात्र बताते थे और गोरखपुर में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने की बात करते थे. खोराबार क्षेत्र का रहने वाला दयानंद यादव इसी इलाके में तारामंडल स्थित पेट्रोल पंप पर काम करता था. वह भी इस नेटवर्क से जुड़ा था. एटीएस उसे भी गिरफ्तार कर साथ ले गयी है.
गिरफ्तार लोगों के संबंध के बारे में चल रही छानबीन रू गोपालगंज जिले के मांझा थाने के आलापुर गांव के मुकेश प्रसाद का गोरखपुर, प्रतापगढ़ व रीवा से गिरफ्तार किये गये आरोपितों के साथ संबंध है या नहीं, स्थानीय पुलिस की मदद से लखनऊ एटीएस की टीम इसका पता लगा रही है. गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में उन्होंने एक-दूसरे से संबंध होने या उन्हें पहले से जानने से इन्कार किया है.
नईम की गिरफ्तारी के बाद गोरखपुर को बनाया ठिकाना!
लश्कर-ए-तैयबा के आंतकी शेख अब्दुल नईम की वाराणसी से गिरफ्तारी के बाद एनआईए की टीम ने उसके करीबी बेदार बख्त उर्फ धन्नू राजा को एक दिसंबर, 2017 को गिरफ्तार किया गया था. उसके बाद एनआईए ने खजूरबानी के रहने वाले महफूज को 20 जनवरी को गिरफ्तार किया. लश्कर के नेटवर्क का भंड़ाफोड़ होने के बाद मुकेश प्रसाद गोरखपुर को अपना ठिकाना बना लिया था. इस तमाम बिंदुओं पर सुरक्षा एजेंसियां काम कार रही है. उसके नेटवर्क से अभी कई लोगों की जानकारी मिली है.
