सोन नदी को फल्गु नदी से जोड़ने की बहुप्रतीक्षित और महत्वकांक्षी योजना को 996.05 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद पूरे मगध क्षेत्र में विकास की नई उम्मीदें जग गई हैं. इस योजना के धरातल पर उतरने से न केवल कुशल जल प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि कृषि, पर्यावरण और पूरे क्षेत्र के समग्र विकास को एक नई गति मिलने की प्रबल संभावना जताई जा रही है.
इसी ऐतिहासिक सौगात के सिलसिले में मगध क्षेत्र के एक प्रमुख प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात कर इस दूरदर्शी योजना की स्वीकृति के लिए उन्हें धन्यवाद दिया और बधाई दी.
मील का पत्थर साबित होने वाली पहल
प्रतिनिधिमंडल ने सीएम के सामने अपनी बात रखते हुए कहा कि 'सोन-फल्गु नदी जोड़ योजना' उत्तर बिहार की भीषण बाढ़ और दक्षिण बिहार की स्थायी सुखाड़ की विकराल समस्या के समाधान की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण और मील का पत्थर साबित होने वाली पहल है.
इस योजना को अमर शहीद बाबू जगदेव प्रसाद और जगलाल बाबू की जल प्रबंधन से जुड़ी महान सोच को धरातल पर आगे बढ़ाने वाले एक बड़े कदम के रूप में भी देखा जा रहा है.
मुख्यमंत्री को भेंट की गई बाबू जगदेव प्रसाद पर आधारित पुस्तक
मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे इस शिष्टमंडल में प्रख्यात इतिहासविद एवं पुरातत्ववेत्ता डॉ. शत्रुधन दांगी, युवा प्रयास मगध के अध्यक्ष प्रो. कौशलेन्द्र कुमार सिंह, संग्रामपुर के पूर्व प्रमुख सह 'दांगी गांधी' के रूप में प्रसिद्ध प्रमोद कुमार दांगी, सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद कुमार दांगी और जाने-माने फिल्म निर्देशक एवं लेखक प्रेम कुमार विद्यार्थी सहित दर्जनों गणमान्य समाजसेवी शामिल रहे.
मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने मुख्यमंत्री को पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र और बुके भेंट कर उनका आत्मीय अभिनंदन किया. इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री को अमर शहीद बाबू जगदेव प्रसाद के जीवन पर आधारित एक विशेष पुस्तक भी भेंट की.
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मुख्यमंत्री ने प्रख्यात लेखक प्रेम कुमार विद्यार्थी को बाबू जगदेव प्रसाद के जीवन पर फिल्म बनाने और पुस्तक लिखने के लिए विशेष रूप से बधाई दी. इस दौरान मुख्यमंत्री ने बिहार में फिल्म उद्योग और कला संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार द्वारा हरसंभव काम करने की बात भी दोहराई.
मगध क्षेत्र में कृषि और पर्यावरण को मिलेगी नई मजबूती
प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस बहुउद्देशीय योजना के सफल क्रियान्वयन से गया जिले समेत पूरे मगध क्षेत्र में भू-जल स्तर और पानी की उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार होगा. इससे न केवल सिंचाई के जरिए कृषि क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे.
