Snake Bite Cases in Monsoon : बारिश की शुरुआत के साथ ही जिले में सर्पदंश की घटनाओं में बहुत ही बढ़ोतरी हो गयी है. ग्रामीण से लेकर शहरी दोनों जगहों से मरीज लगातार अस्पतालों में पहुंच रहे हैं. जिले में सीएचसी, अनुमंडल अस्पताल व सदर हॉस्पिटल में हर दिन दो-चार सर्पदंश के मरीज पहुंच रहे हैं.
इसके अलावा मगध मेडिकल अस्पताल में भी हर दिन इतनी ही संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं. गनीमत यह रही है कि सरकारी अस्पतालों में हर जगह सर्पदंश के बाद मरीज को बचाने के लिए दिया जाने वाला इंजेक्शन पूरी तरह उपलब्ध है.
बरसात में क्यों बढ़ जाते हैं सांप काटने के मामले
चिकित्सकों के अनुसार, बरसात में सांप अपने बिलों से निकलकर सूखी और सुरक्षित जगहों की तलाश में अक्सर घरों व खेतों में आ जाते हैं, जिससे ये हादसे बढ़ते हैं. इस मौसम में लोग खेतों में खेती-किसानी का काम ज्यादा करते हैं, जिसकी वजह से खेतों और ग्रामीण इलाकों में सर्पदंश के मामले ज्यादा देखने को मिलते हैं.
अक्सर देखा जाता है कि सांप काटने के बाद लोग डरकर या अंधविश्वास के चलते झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ जाते हैं. इस लापरवाही की वजह से समय पर सही इलाज नहीं मिल पाता और मरीज की मौत हो जाती है. समय रहते सही तरीका अपनाया जाये, तो सांप के डसने के बाद भी मरीज की जान आसानी से बचाई जा सकती है.
बरसात में घर के आसपास झाड़ियां, कचरा और गंदगी जमा न होने दें. इसके साथ ही घर में मौजूद सभी दरारों और गड्ढों को बंद कर दें ताकि सांप अंदर न आ सकें.
सर्पदंश के मरीजों का आधिकारिक आंकड़ा
| अस्पताल का नाम | माह | मरीजों की संख्या |
| मगध मेडिकल अस्पताल | जून | 102 |
| सदर, सीएचसी व अनुमंडल | जून | 150 |
| मगध मेडिकल अस्पताल | जुलाई | अब तक 52 करीब |
| सदर, सीएचसी व अनुमंडल | जुलाई | 80 करीब |
(नोट: इसके अलावा प्राइवेट अस्पतालों में भी सर्पदंश के मरीज इलाज करवाते हैं, जिनका मौत का सटीक आंकड़ा नहीं मिल पा रहा है.)
समय रहते इलाज कराने से बचायी जा सकती है जान
डॉक्टरों का कहना है कि समय पर इलाज मिलने से 99 प्रतिशत मरीजों की जान आसानी से बचायी जा सकती है. लोग अक्सर झाड़-फूंक के चक्कर में कीमती समय बर्बाद कर देते हैं, जिससे मरीज की स्थिति गंभीर हो जाती है. रात में सोते समय हमेशा मच्छरदानी का प्रयोग करें और जमीन पर बिल्कुल न सोएं.
खेत या घास वाले इलाके में जाते समय जूते और मोटे कपड़े जरूर पहनें. करैत, नाग (कोबरा) और रसेल वाइपर जैसे सांप सबसे ज्यादा जहरीले माने जाते हैं. अगर इनमें से कोई भी सांप किसी को काट ले, तो मरीज को 30 मिनट से लेकर 2 घंटे के भीतर अपने नजदीकी अस्पताल लेकर जायें. समय पर अस्पताल पहुंचने पर लगभग सभी मरीजों की जान बच ही जाती है.
Gaya Ji News : अंत में अस्पताल पहुंचने से नहीं होता कोई फायदा
अक्सर यह देखा जाता है कि ग्रामीण इलाकों में सर्पदंश के बाद झाड़-फूंक करने वाले ओझा-गुणी को ढूंढने में लोग काफी समय बर्बाद कर देते हैं. बहुत अधिक समय बीतने के बाद जब स्थिति बिगड़ जाती है, तब लोग मरीज को अस्पताल लेकर पहुंचते हैं. काफी देर होने के चलते यहाँ डॉक्टर भी मरीज के लिए कुछ नहीं कर पाते हैं.
बाद में लोग सिर्फ झाड़-फूंक करने वालों को कोसते रह जाते हैं. स्वास्थ्य डीपीएम नीलेश कुमार ने बताया कि जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में सर्पदंश के बाद मरीज के बचाव के लिए दिया जाने वाला आवश्यक इंजेक्शन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है.
सर्पदंश के मरीजों को समय रहते त्वरित इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने का कड़ा निर्देश जारी किया गया है. सर्पदंश के बाद मरीज की जान बचाने के लिए जल्द-से-जल्द लोगों को सरकारी अस्पताल लेकर आना चाहिए.
सर्पदंश होने पर क्या करें और क्या न करें
डॉ. देव कुमार चौधरी (मेडिकल ऑफिसर, मगध मेडिकल अस्पताल) के अनुसार, सर्पदंश के बाद घबराने के बजाय पीड़ित व्यक्ति को बिल्कुल शांत रखें और उसे अनावश्यक चलने-फिरने न दें. सांप द्वारा काटे गये अंग को पूरी तरह स्थिर रखें तथा पीड़ित को यथाशीघ्र चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध करायें.
झाड़-फूंक, घरेलू उपचार अथवा तंत्र-मंत्र के चक्कर में समय बर्बाद करना पूरी तरह जानलेवा साबित हो सकता है. सर्प को ढूंढने, पकड़ने या फिर उसे मारने में अपना समय बिल्कुल न बर्बाद करें.
सर्पदंश की जगह पर ब्लेड, चाकू या किसी भी अन्य धारदार हथियार से चीरा बिल्कुल नहीं लगाना चाहिए. सर्पदंश के बाद जान बचाने के लिए हर हाल में लोगों को डॉक्टर के पास अस्पताल ही आना होता है.
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