OTA Gaya Passing Out Parade 2026 : ओटीए गया में 29वीं पासिंग आउट परेड में शनिवार को पास आउट हुए नये सैन्य अधिकारियों ने अपनी लगन, मेहनत के बल पर मुकाम हासिल किया. शौर्य, ज्ञान, संकल्प को लिए वे सेना में लेफ्टिनेंट बन कर देश सेवा को समर्पित किये गये.
ओटीए गया में इन दिनों शॉर्ट टर्म सर्विस कमीशन (टेक्निकल) के अधिकारी निकल रहे हैं. यहा महिला व पुरुष दोनों को ट्रेनिंग दी जा रही है. वर्तमान में युद्ध के बदलते स्वरूप, नयी तकनीक, एआइ, साइबर फायर से बचाव की ट्रेनिंग दी जा रही है.
स्वॉर्ड ऑफ ऑनर व गोल्ड मेडल विजेता पी शशि कुमार
किसी भी सफलता प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत व लगन की जरूरत पड़ती है. इसी के बदौलत मुझे स्वॉर्ड ऑफ ऑनर व गोल्ड मेडल प्राप्त हुआ है. माता-पिता का सपोर्ट व यहां के इंस्ट्रक्टर व अधिकारी के अनुशासन व उत्साह ने मुझे यह गौरव दिलाया है. मैं परेड कमांडर भी रहा. पिताजी भी आर्मी में रहे हैं. तगड़ा 65 को अचीव किया.
मैं तीन साल तक असम रायफल में रह चुका हूं. आज यहां से लेफ्टिनेंट होकर पोस्टिंग पर जाऊंगा.ओटीए गया में 29वीं पासिंग आउट परेड में शनिवार को पास आउट हुए नये सैन्य अधिकारियों ने अपनी लगन, मेहनत के बल पर मुकाम हासिल किया.
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शौर्य, ज्ञान, संकल्प को लिए वे सेना में लेफ्टिनेंट बन कर देश सेवा को समर्पित किये गये. ओटीए गया में इन दिनों शॉर्ट टर्म सर्विस कमीशन (टेक्निकल) के अधिकारी निकल रहे हैं. यहा महिला व पुरुष दोनों को ट्रेनिंग दी जा रही है. वर्तमान में युद्ध के बदलते स्वरूप, नयी तकनीक, एआइ, साइबर फायर से बचाव की ट्रेनिंग दी जा रही है.
सिल्वर मेडल विजेता अरुषि पांडेय व स्पर्श छेत्री की कहानी
भोपाल के रहने वाली अरुषि पांडेय ने बताया कि सिग्ननल कोर्स में मेरा कमिशनिंग हुआ है. स्वीमिंग में नेशनल वीनर भी रह चूकी हूं. एकेडमी में भी काफी खेलों में हिस्सा लिया. कोर ऑफ इंजीनियर सिल्वर मेडल मिला. खेलकूद में शुरू से रुचि थी. पापा के साथ स्वीमिंग भी करती थी. स्कूल में टेबल टेनिस से बढ़ावा मिला.
देहरादून (उत्तराखंड) के रहने वाले लेफ्टिनेंट स्पर्श छेत्री ने बताया की सेना में मेरे परिवार की मैं पांचवीं पीढ़ी हूं, जो देश सेवा देने जा रहे हैं. मां रितू क्षेत्री, पिताजी बेसी क्षेत्री फिलहाल सेना में ही हैं. नाना भी सेना में अपनी सेवाएं दे चुके हैं.
बचपन से ही परिवार के लोगों को आर्मी की वर्दी में देखकर मेरे मन में भी सेना में सेवा देने की इच्छा जागी. पिताजी कारगिल युद्ध में शामिल रहे हैं और मां ने भी ऑपरेशन विजय में अपनी भूमिका निभायी है.
खेल और अनुशासन के बल पर सेना में पहुंचे सैयद अबूर ऐरा
ओडिशा के रहने वाले सैयद अबूर ऐरा ने बताया की मेरे मां और पिताजी शिक्षक हैं. इसलिए बचपन से ही अनुशासन और सेवा का भाव रहा है. राष्ट्रीय स्तर के फुटबॉलर भी रह चुके हैं. खेल के साथ-साथ देश के लिए सेवा और समर्पण की भावना भी मन में हमेशा रही है. अनुशासन में रहा हूं, इसलिए यहां कोई परेशानी नहीं हुई. यहां के प्रशिक्षक व माता-पिता के उत्साह के बदौलत आज सेना में अधिकारी बना हूं.
पारिवारिक प्रेरणा से लेफ्टिनेंट बने राघवेंद्र झा
दरभंगा के रहने वाले लेफ्टिनेंट राघवेंद्र झा अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी हैं. मैं सेना में परिवार की तीसरी पीढ़ी हूं, जो भारतीय सेना में अपनी सेवाएं देने जा रहा हूं. दादाजी और चाचा जी पहले से ही देश सेवा के लिए समर्पित रहे हैं. पिता जी देवेंद्र कुमार झा भी अर्द्धसैनिक बल में अधिकारी हैं.
बचपन से ही सपना सेना में जाने का था और परिवार के मार्गदर्शन एवं सहयोग ने इस सपने को और मजबूत किया. युवा पीढ़ी को संदेश है कि “कोई भी लक्ष्य आपसे बड़ा नहीं है.” पिताजी बेटे को लेफ्टिनेंट की वर्दी में देखकर खुशी जाहिर की.
