आजाद पार्क स्थित जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन भवन में पटना से आए कलाकार द्वय ने रवींद्रनाथ टैगोर की प्रसिद्ध कहानी 'तोता' का ऐसी भाव-भंगिमा के साथ वाचन किया कि श्रोता समय भूल गए.
कार्यक्रम में किस्सागोई के लिए मशहूर डॉ. संतोष राणा और अजीत कुमार आए हुए थे. दोपहर तीन बजे से इस डेढ़ घंटे के शो की शुरुआत सम्मेलन भवन के सभापति सुरेंद्र सिंह 'सुरेंद्र' के स्वागत भाषण के तुरंत बाद हुई.
शिक्षा प्रणाली पर जबरदस्त कटाक्ष
कहानी के माध्यम से दिखाया गया कि एक तोते को पढ़ाने के लिए सोने का पिंजरा बनवाया गया, नई किताबें बनवाई गईं, नए शिक्षक और सुपरवाइजर बहाल हुए. उद्घाटन हुए, स्वागत हुआ और इनाम बंटे, लेकिन इन सब के बावजूद तोता पढ़ नहीं सका. अलबत्ता इस नए प्रयोग से तंग आकर तोता मर गया.
वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर व्यंग्य करती यह किस्सागोई आज की शिक्षा व्यवस्था पर एक जबरदस्त कटाक्ष थी. दोनों कथावाचकों की बेहतरीन प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया.
साहित्यकार, कवि और शिक्षक रहे मौजूद
इस अवसर पर डायट गया के कई व्याख्याताओं के अलावा बड़ी संख्या में शिक्षक, साहित्यकार और कवि मौजूद थे.
कार्यक्रम के सफल आयोजन में सम्मेलन से जुड़े उदय कुमार, अरविंद कुमार, उपेंद्र कुमार और विनोद बरविगहिया की प्रमुख भूमिका रही. कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन उप सभापति अरुण हरलिवाल ने किया.
