गयाजी से जितेंद्र मिश्रा की रिपोर्ट
Gayaji Medical Hospital: गयाजी के सबसे बड़े अस्पताल (अनुग्रह मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल) में जूनियर डॉक्टरों के आंदोलन का असर लगातार दूसरे दिन भी देखने को मिला. इमरजेंसी सेवा पूरी तरह ठप रही और मुख्य गेट पर ताला जड़ा रहा. इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को बिना उपचार के वापस लौटना पड़ा, जबकि गंभीर मरीजों को दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ा. दो दिनों में 200 से अधिक मरीज प्रभावित होने की बात सामने आ रही है.
इमरजेंसी गेट पर ताला लगाकर धरने पर बैठे जूनियर डॉक्टर
अस्पताल परिसर में जूनियर डॉक्टर इमरजेंसी रजिस्ट्रेशन काउंटर के पास बैनर लगाकर धरने पर बैठे हैं. आंदोलनरत डॉक्टरों ने इमरजेंसी सेवा पूरी तरह बंद कर दी है और किसी भी अधिकारी की बात सुनने को तैयार नहीं हैं. उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.
मरीजों की बढ़ी परेशानी
इमरजेंसी सेवा बंद होने के कारण अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. अस्पताल सूत्रों के मुताबिक पिछले दो दिनों में 200 से अधिक इमरजेंसी मरीजों को अन्य अस्पतालों में जाकर इलाज कराना पड़ा है. वहीं पहले से भर्ती कई मरीज भी अस्पताल छोड़ने लगे हैं.
रविवार होने से नहीं दिखी प्रशासनिक सक्रियता
रविवार होने के कारण अस्पताल प्रशासन और अधिकारियों की ओर से इमरजेंसी सेवा बहाल कराने के लिए अपेक्षित प्रयास नहीं दिखे. मरीजों और उनके परिजनों में इस स्थिति को लेकर नाराजगी भी देखने को मिली.
अस्पताल अधीक्षक बोले- डॉक्टरों को मनाने की कोशिश जारी
अस्पताल अधीक्षक डॉ. प्रवीण कुमार अग्रवाल ने बताया कि शनिवार देर रात तक जूनियर डॉक्टरों को समझाने और आंदोलन समाप्त कराने की कोशिश की गई, लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकल सका. उन्होंने कहा कि जल्द ही वैकल्पिक प्रयास कर इमरजेंसी सेवा को फिर से शुरू कराने की कोशिश की जाएगी.
जूनियर डॉक्टरों ने गिनाईं अपनी समस्याएं
आंदोलनरत डॉक्टरों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज में उनके लिए पर्याप्त हॉस्टल सुविधा उपलब्ध नहीं है. इसके अलावा अस्पताल और कॉलेज परिसर तक जाने वाली सड़कें जर्जर हैं. नालियों का पानी सड़कों पर बहता रहता है. ऐसी परिस्थितियों में पढ़ाई और मरीजों का उपचार दोनों प्रभावित होते हैं.
‘हर बार सिर्फ आश्वासन मिलता है’
जूनियर डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि हर आंदोलन के बाद प्रशासन केवल आश्वासन देता है, लेकिन समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते. उन्होंने कहा कि वर्षों से हॉस्टल, सड़क और बुनियादी सुविधाओं की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ है.
आर-पार की लड़ाई का ऐलान
डॉक्टरों ने स्पष्ट कहा है कि इस बार आंदोलन आर-पार की लड़ाई होगी. उनका कहना है कि जब तक सभी प्रमुख मांगों को पूरा नहीं किया जाएगा, तब तक धरना और आंदोलन जारी रहेगा. इस बीच सबसे ज्यादा परेशानी उन मरीजों को हो रही है जिन्हें आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की जरूरत है.
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल
प्रमंडल के सबसे बड़े अस्पताल की इमरजेंसी सेवा लगातार दूसरे दिन बंद रहने से स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. मरीजों और परिजनों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द समाधान निकालकर इमरजेंसी सेवाओं को बहाल करेगा, ताकि गंभीर मरीजों को राहत मिल सके.
