गया जी से धर्मपाल सिंह की रिपोर्ट
Gaya Ji News: आर्थिक तंगी और अभावों से जूझते हुए गया जी जिले की एक बेटी ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसकी पूरे बिहार में चर्चा हो रही है. टनकुप्पा प्रखंड के गोइनिया गांव की रहने वाली ममता कुमारी ने पैरामेडिकल प्रवेश परीक्षा में अनुसूचित जाति वर्ग में पूरे बिहार में प्रथम स्थान और सामान्य वर्ग में आठवां रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया है. उनकी इस सफलता पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने वीडियो कॉल कर बधाई दी और हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया.
झोपड़ी से टॉपर तक का सफर
ममता कुमारी एक बेहद गरीब महादलित परिवार से आती हैं. भुइयां-मुसहर समाज से संबंध रखने वाली ममता ने सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपनी मेहनत और लगन के बल पर यह मुकाम हासिल किया है. उनकी सफलता अब संघर्ष कर रहे हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा बन गई है.
जीतन राम मांझी ने की सीधी बात
पूर्व मुख्यमंत्री सह केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने वीडियो कॉल के माध्यम से ममता कुमारी से बातचीत की. उन्होंने कहा कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और उसके प्रति समर्पण हो, तो अभाव भी सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बन सकता. उन्होंने ममता के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए किसी भी आर्थिक परेशानी में मदद का आश्वासन दिया.
अनुसूचित जाति वर्ग में बिहार टॉपर
ममता कुमारी ने पैरामेडिकल प्रवेश परीक्षा में अनुसूचित जाति वर्ग में पूरे बिहार में प्रथम स्थान प्राप्त किया है. इतना ही नहीं, सामान्य वर्ग की मेरिट सूची में भी उन्होंने आठवां स्थान हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है. यह उपलब्धि न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बन गई है.
सांसद प्रतिनिधि पहुंचे गांव
ममता की सफलता की खबर मिलते ही सांसद प्रतिनिधि नंदलाल मांझी उनके गांव गोइनिया पहुंचे. उन्होंने अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया और मिठाई खिलाकर बधाई दी. साथ ही आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए तत्काल आर्थिक सहयोग भी प्रदान किया. ममता की सफलता के पीछे उनके शिक्षक चंदन कुमार का भी बड़ा योगदान रहा है. बताया गया कि बादिल बीघा निवासी शिक्षक चंदन कुमार पिछले आठ वर्षों से उन्हें नि:शुल्क शिक्षा दे रहे थे. लगातार मार्गदर्शन और मेहनत का ही परिणाम है कि ममता आज बिहार की टॉपर बनी हैं.
आगे भी मिलेगी हर संभव मदद
नंदलाल मांझी ने कहा कि ममता जैसी प्रतिभाएं समाज का हीरा होती हैं. जरूरत है उन्हें पहचानने, तराशने और आगे बढ़ाने की. उन्होंने कहा कि जीतन राम मांझी ने भी ममता की पढ़ाई और भविष्य के लिए हरसंभव सहायता का भरोसा दिया है. ममता कुमारी के पिता सुरेंद्र मांझी बेहद साधारण आर्थिक स्थिति में परिवार का पालन-पोषण करते हैं. तमाम कठिनाइयों के बावजूद ममता ने हार नहीं मानी और अपने सपनों को पूरा करने के लिए लगातार मेहनत करती रहीं. आज उनकी सफलता ने यह साबित कर दिया है कि मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के सामने गरीबी भी हार मान लेती है.
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